
पटना: बिहार विधानमंडल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच सियासी टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया। हालिया घटनाक्रम ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के रिश्तों में बढ़ती तल्खी को उजागर कर दिया है। पहले विधानसभा और अब विधान परिषद में हुई तीखी नोकझोंक ने बिहार की राजनीति को गरमा दिया है।
तीन दिन पहले विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सरकार के खिलाफ बोलने के लिए बीच में ही खड़े हो गए थे। इस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नाराज हो गए और उन्होंने तेजस्वी को “बच्चा हो, चुप रहो” जैसे शब्द कहकर टोक दिया। इतना ही नहीं, बहस के दौरान उन्होंने तेजस्वी के पिता और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का भी जिक्र किया, जिससे विपक्षी खेमे में नाराजगी और बढ़ गई।
सोमवार को यही सियासी तनाव विधान परिषद में भी देखने को मिला। कार्यवाही के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद सदस्य राबड़ी देवी ने जोरदार तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की। शोर-शराबा बढ़ने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आपा खो बैठे और हंगामा कर रहे सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह दी। सीएम के इस बयान के बाद राजद के विधान पार्षदों ने और तीखा विरोध शुरू कर दिया, जिससे सदन में हंगामा और बढ़ गया।
राजद नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री लगातार विपक्ष के नेताओं के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन हो रहा है। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है और सरकार को अपना पक्ष रखने से रोका जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में व्यक्तिगत टिप्पणियों और तीखी बयानबाजी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और गहराने की आशंका है, खासकर तब जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। सदन के भीतर और बाहर जारी यह सियासी संघर्ष फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।






