
पटना: बिहार की सियासत में अब बड़ा बदलाव नजर आ रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन भर दिया। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा। हालांकि, बीजेपी और JDU दोनों पार्टियों ने फिलहाल इस बदलाव को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाई है। सूत्रों के अनुसार, 16 मार्च तक राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होगी और 9 अप्रैल के बाद नए राज्यसभा सदस्यों की शपथ होगी।
इस बीच, दोनों पार्टियों के विधायक दल की बैठकें बुलाई जाएंगी, जिसमें विधायक दल के नेता चुने जाएंगे और इसके बाद NDA का नेता तय होगा। इसके बाद नीतीश कुमार इस्तीफा देंगे और नए नेता सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। भाजपा सूत्रों के अनुसार, रामनवमी (26 मार्च) तक नई सरकार का गठन संभव है, जिसमें पहली बार बिहार में BJP का मुख्यमंत्री शपथ ले सकता है। नई सरकार में 32 मंत्री शामिल हो सकते हैं, जिनमें BJP और JDU के 14-14 मंत्री, LJP(R) के 2 और RLM-HAM के 2 मंत्री हो सकते हैं।
CM पद के लिए BJP के दो प्रमुख दावेदार हैं – सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा। सम्राट चौधरी कोइरी समुदाय से आते हैं और उनके पास संगठन एवं प्रशासनिक अनुभव है। वे नीतीश कुमार के विरोधी के रूप में भी आक्रामक भूमिका निभा चुके हैं। दूसरी ओर, विजय सिन्हा भूमिहार समुदाय से आते हैं और संघ का भरोसा रखते हैं। उन्होंने कई बार मंत्री और डिप्टी CM के रूप में कार्य किया है और मजबूत प्रशासनिक पकड़ रखी है।
JDU के दो डिप्टी CM बनाए जाने की संभावना है। इनमें निशांत कुमार, नीतीश कुमार के बेटे, और विजय चौधरी के नाम प्रमुख हैं। निशांत कुमार राजनीति में अपेक्षाकृत नए हैं, लेकिन जातिगत और पार्टी समीकरणों के लिहाज से उपयुक्त माने जा रहे हैं। विजय चौधरी जदयू के भीतर और बाहर नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेता हैं और रणनीतिक मामलों में उनका अनुभव महत्वपूर्ण माना जाता है।
सियासी विश्लेषक मानते हैं कि नई सरकार में BJP पहली बार मुख्यमंत्री पद हासिल कर सकती है और JDU के दो डिप्टी CM के साथ 32 सदस्यीय फुल फ्लैग्ड कैबिनेट बन सकती है, जिससे बिहार की राजनीति में नया समीकरण स्थापित होगा।






