पटना: पटना के पारस अस्पताल में घुसकर हुई चंदन मिश्रा की हत्या के बाद बिहार पुलिस की कार्रवाई जा रही है। पुलिस जांच में पता चला कि शास्त्रीनगर के कुछ पुलिसकर्मियों ने इस मामले में लापरवाही बरती। इसलिए पटना एसएसपी ने जांच के बाद तत्काल प्रभाव से इन्हें निलंबित कर दिया। पटना पुलिस के अनुसार, ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में शास्त्रीनगर थाना के पुअनि के एक पदाधिकारी, सअनि स्तर के दो पदाधिकरी और दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। बता दें कि 17 जुलाई जिस पारस हॉस्पिटल में कुख्यात चंदन मिश्रा की हत्या हुई थी, वह जगह पुलिस मुख्यालय से लगभग उतना ही करीब है, जितना पटना हवाई अड्डा से। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी पहुंची और फिर जांच-पड़ताल, पूछताछ और एफएसएल टीम के द्वारा जांच किया। इसके बाद विपक्ष ने फिर से पटना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया।
विपक्ष के नेताओं ने कहा कि छह अपराधी आए और हत्या कर आराम से फरार हो गए लेकिन पुलिस उन्हें देख तक नहीं पाई। इसके बाद पटना के वरीय अधिकारियों ने मामले की जांच का आदेश दिया। इसमें पांच पुलिसकर्मी लापरवाह पाए गए। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीसीटीवी फुटेज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि घटना के कुछ घंटों के अंदर पारस अस्पताल में चंदन मिश्रा हत्या कांड का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ गया थ, जिसमें यह दिख रहा है कि पांच अपराधी बड़े आराम से पारस अस्पताल के अंदर कमरे में प्रवेश करते हैं और फिर फायरिंग कर बाहर निकल गये। साथ ही उनके जाने का भी सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें दो बाइक पर तीन-तीन अपराधी हथियार लहराते हुए दिख रहे हैं।
घटना करने के बाद ये छह अपराधी पारस अस्पताल से सटी गली से निकलते हुए बड़े आराम से अपने गंतव्य की ओर निकल गए। अपराधी जिस रास्ते से फरार हुए, वह रास्ता भी सीसीटीवी में कैद हो चुका। लेकिन एक भी अपराधी को पुलिस पकड़ नहीं पाई? यह बड़ा सवाल है। घटनास्थल तक पुलिस के अलावा कोई और नहीं पहुंच पाया, इसलिए गोलियों की संख्या स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। शुरुआती समय में यह कहा जा रहा था कि अपराधियों ने उन्हें चार गोलियां मारी हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और हैं। चंदन मिश्रा को 4 नहीं 36 गोलियां मारी थी। ‘अमर उजाला’ ने मृतक के एक बहुत ही नजदीकी से बातचीत की, जिसमें उन्होंने यह बताया कि अपराधियों ने कुख्यात चंदन मिश्रा पर कुल 36 गोलियां बरसाईं। कंधा से लेकर पैर तक कुल 36 गोलियां लगी थीं। अपराधियों ने फ़िल्मी स्टाइल में कंधे से लेकर पैर तक कोई ऐसी जगह नहीं छोड़ी थी, जहां गोलियां नहीं मारी।







