पटना। बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की रहस्यमयी मौत ने पूरे राज्य ही नहीं, देशभर में सनसनी फैला दी। शुरुआती जांच पर सवाल उठने के बाद मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI को सौंपा गया। अब सवाल यह है कि जांच एजेंसी ने अब तक क्या किया, किन बिंदुओं पर काम चल रहा है और आखिर सच सामने आने में कितनी देर है? बता दें कि छात्रा की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई थी। परिजनों ने शुरुआत से ही हत्या की आशंका जताई और स्थानीय जांच पर भरोसा नहीं होने की बात कही। बढ़ते दबाव और जनभावना को देखते हुए जांच CBI को ट्रांसफर कर दी गई। CBI ने केस संभालते ही सबसे पहले स्थानीय पुलिस की पूरी केस डायरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य अपने कब्जे में लिए। इसके बाद घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया गया।
जांच एजेंसी का फोकस यह समझना रहा कि घटना से पहले और बाद में क्या-क्या हुआ। जांच का सबसे अहम हिस्सा छात्रा का मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री, सोशल मीडिया इंटरैक्शन और लोकेशन डेटा की गहन जांच की जा रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि मौत से पहले छात्रा किन लोगों के संपर्क में थी। CBI ने परिवार, दोस्तों, कोचिंग से जुड़े लोगों, हॉस्टल या आसपास मौजूद व्यक्तियों सहित कई लोगों से पूछताछ की है। सीबीआई मृतका के मामा से भी लगातार पूछ ताछ कर रही है। मौत के कारणों को लेकर किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति खत्म करने के लिए मेडिकल विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फॉरेंसिक विश्लेषण भी कराया गया है, ताकि वैज्ञानिक आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सके।
वही जांच एजेंसियों के अनुसार, हाई-प्रोफाइल मामलों में ठोस साक्ष्य के बिना कार्रवाई नहीं की जाती। CBI पहले घटनाक्रम को पूरी तरह स्पष्ट करना चाहती है ताकि अदालत में केस मजबूत रहे। इधर परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है और उन्हें उम्मीद है कि CBI सच्चाई सामने लाएगी। वहीं यह मामला अब संवेदनशील सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुका है, इसलिए हर अपडेट पर लोगों की नजर बनी हुई है। हालांकि जांच अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ रही है। डिजिटल और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद एजेंसी आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह मामला आत्महत्या, दुर्घटना या किसी साजिश का परिणाम था। नीट छात्रा मौत कांड सिर्फ एक क्राइम केस नहीं, बल्कि सिस्टम पर भरोसे की परीक्षा भी बन गया है। अब सबकी निगाहें CBI की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं — क्योंकि सच सामने आना ही सबसे बड़ा न्याय होगा।







