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बेगूसराय में NDA की नई रणनीति, JDU की हारी सीटें अब BJP और LJP-R के खाते में

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NDA's new strategy in Begusarai, JDU's lost seats now go to BJP and LJP-R

पटनाः बेगूसराय की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शंखनाद के बाद राजनीतिक गलियारों में कई प्रश्न उठने लगे है। क्या बेगूसराय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू चलेगा? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हनुमान का हेलीकॉप्टर बेगूसराय जिला में उड़ेगा? क्या गत चुनाव में तीन-तीन सीटें पर हारी जदयू इस बार अपना बदला साथी दलों को जीता कर लेगी? क्या हारी हुई सीटों पर बीजेपी का कमल खिलेगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेगूसराय में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते कहा कि एनडीए के लिए उनका विश्वास और प्यार हमेशा बना रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार का विकास नए दौर में जा रहा है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से बिहार को समृद्धि के मार्ग पर ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपके माता-पिता ने जंगल राज से मुक्त कर सुशासन चुना था। अब 2025 में यह अक्टूबर और नवंबर आपके लिए नए अवसर और बड़ी जिम्मेदारी लेकर आए हैं। आपको अपनी एक वोट की ताकत समझनी है, क्योंकि इसी से बिहार की समृद्धि तय होगी।

उन्होंने जनता से अपील की कि विकास के रास्ते को प्रशस्त करने में योगदान दें और महागठबंधन के दलों के विरोध में निर्णय लें। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव के सापेक्ष देखें तो बेगूसराय जिला में में एनडीए की स्थिति ठीक नहीं है। इस जिला के कुल 7 विधानसभा सीटों में स्थिति यह थी कि जदयू ने ही चेरिया बरियारपुर, तेघड़ा, मटिहानी और साहेबपुर कमाल की सीटें ही गवा दी। बीजेपी को भी बखरी विधानसभा में में पराजय मिली। तब राजद चेरिया बरियारपुर, साहेबपुर कमाल, से जीत दर्ज की तो सीपीआई ने तेघरा और बखरी विधानसभा पर कब्जा जमाया। जीत की रणनीति बनाते एनडीए ने तेघरा बीजेपी को तो लोजपा-आर को साहेबपुर कमाल और बखरी सौंप कर लड़ाई को नए अंदाज में लड़ने का मन बनाया है। अब इस नए समीकरण को कितनी सफलता मिलती है यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इस बार एनडीए अंदाज बदल कर महागठबंधन को चुनौती दे रही है। जानिए यह नया अंदाज क्या है? चेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट जदयू के पास है। विधानसभा चुनाव 2020 में जदयू की उम्मीदवार मंजू वर्मा को राजद के राजवंशी महतो से हार का सामना करना पड़ा। इस बार चेरिया बरियारपुर विधानसभा का जंग नए रंग में लड़ा जा रहा है।

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6 नवंबर को होने वाले वाले चुनाव में आमने सामने की लड़ाई में दोनों ही गठबंधन ने नए उम्मीदवार पर भरोसा जताया है। इस बार जदयू ने अभिषेक आनंद और राजद ने सुशील कुशवाहा को उतारा है। जदयू यहां कांटे की टक्कर में फंसा है। वर्ष 2020 का चुनाव भी जदयू लगभग 41 हजार मतों से पराजित हुई थी। जदयू को वर्ष 2025 तेघड़ा विधानसभा की जंग ने काफी मतों से हारी मिली थी। तब सीपीआई के राम रतन सिंह ने जदयू के बृजेंद्र कुमार को करीब 48 हजार मतों से हराया था। इस बार जदयू ने यह सीट बीजेपी को दे दी और यहां से पूर्व एम एल सी रजनीश कुमार सी पी आई के राम रतन सिंह से चुनावी जंग हार गए थे। वर्ष 2020 में साहेबपुर कमाल विधानसभा की जंग भीं जदयू हार गई थी। तब साहेबपुर कमाल से राजद के सत्तानंद संबुद्धा ने जदयू के शशिकांत कुमार को 14 हजार से भी ज्यादा मतों से परास्त किया था। इस बार जदयू की यह सीट लोजपा (आर) के हिस्से में गई और यहां से सुरेंद्र विवेक अब राजद के सत्तानंद संबुद्धा से टक्कर लेंगे। बखरी विधानसभा 2020 की जंग भी बीजेपी हार चुकी थी। यहां सीपीई के सूर्यकांत पासवान ने बीजेपी के रामशंकर पासवान को काफी कम मतों से हराया था। इस बार बीजेपी ने यह सीट लोजपा(आर) को दे दी। लोजपा आर से संजय पासवान उम्मीदवार हैं तो राजद ने अपने पुराने उम्मीदवार सूर्यकांत पासवान पर ही भरोसा किया है।

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