Home बिहार नाम की अड़चन दूर: अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनेंगे मंत्री अशोक चौधरी

नाम की अड़चन दूर: अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनेंगे मंत्री अशोक चौधरी

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Name hurdle removed: Minister Ashok Chaudhary will now become assistant professor

पटना: बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी के लिए मकर संक्रांति इस बार बड़ी राहत लेकर आई है। लंबे समय से अटकी उनकी असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति का रास्ता अब साफ हो गया है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने शिक्षा विभाग को डोजियर सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि अशोक चौधरी के नाम को लेकर उठी विसंगतियां निराधार हैं और उनकी नियुक्ति पूरी तरह वैध है।

दरअसल, सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों में कहीं ‘अशोक कुमार’ तो कहीं ‘अशोक चौधरी’ नाम दर्ज होने के कारण पिछले एक साल से मामला अटका हुआ था। आयोग ने वर्ष 2020-21 में राजनीति विज्ञान विषय में 280 सहायक प्राध्यापक पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। परीक्षा और साक्षात्कार के बाद 2025 में परिणाम घोषित हुआ, जिसमें 276 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। चयनित सूची में अशोक चौधरी का भी नाम शामिल था, लेकिन नाम की भिन्नता के चलते उनकी नियुक्ति पर रोक लग गई थी।

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विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के बाद शिक्षा विभाग को बताया कि विभिन्न प्रमाण पत्रों में दर्ज ‘अशोक कुमार’ और ‘अशोक चौधरी’ एक ही व्यक्ति हैं। आयोग ने अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि अनुसूचित जाति कोटे के तहत मेधा सूची में चयनित अभ्यर्थी की पहचान को लेकर कोई संदेह नहीं है। इसके बाद आयोग ने औपचारिक रूप से उनकी नियुक्ति की अनुशंसा कर दी है।

उल्लेखनीय है कि एक जनवरी को उच्च शिक्षा निदेशक एन.के. अग्रवाल ने आयोग को पत्र लिखकर नाम संबंधी विसंगति पर स्पष्टीकरण मांगा था। आयोग की ताजा रिपोर्ट के बाद अब शिक्षा विभाग जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। इस फैसले से अशोक चौधरी के शैक्षणिक करियर की राह खुल गई है और वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है।

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