पूर्वी चंपारण (बिहार): मनरेगा में कथित भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है, जहां जॉब कार्ड और मजदूरी भुगतान के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग की बात उजागर हुई है। भारत-नेपाल सीमा से सटे पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन प्रखंड अंतर्गत बिजई (विजयी) पंचायत में यह पूरा खेल सामने आया। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि पंचायत स्तर पर कथित रूप से मुखिया के मायके पक्ष के लोगों के नाम पर जॉब कार्ड बनाए गए और उनके खातों में मजदूरी की राशि भेजी गई।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर जॉब कार्ड सक्रिय थे जो या तो गांव में रहते ही नहीं या फिर अन्य कामों में लगे हुए हैं। आरोप है कि बिना वास्तविक श्रम के योजनाओं को पूरा दिखाया गया और राशि खातों में भेजने के बाद 300 से 500 रुपये तक वापस ले लिए जाते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि भरोसेमंद व्यक्तियों के नाम पर कार्ड बनाकर राशि का बंदरबांट किया जाता रहा।
पंचायत रोजगार सेवक ने बातचीत में स्वीकार किया कि जल्दबाजी और दबाव में जॉब कार्ड जारी हुए। संबंधित डेटा ऑपरेटर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मनरेगा के प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि मामला उनके कार्यकाल से पहले का है।
पहली रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। उप विकास आयुक्त (डीडीसी) ने स्वयं मौके पर पहुंचकर कागजातों की जांच की और प्रथम दृष्टया इसे गंभीर अनियमितता व संभावित गबन का मामला बताया। उन्होंने कहा कि विस्तृत जांच जारी है और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप है कि योजनाओं में सीमित मजदूर दिखाकर अधिकांश काम मशीनों से कराया जाता है। जांच आगे बढ़ने के साथ पूरे नेटवर्क के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।







