नालंदा: बिहार में आज नई एनडीए सरकार का शपथ ग्रहण होगा। नीतीश कुमार 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर एक बार फिर शपथ लेंगे। पटना का गांधी मैदान शपथ ग्रहण समारोह के लिए तैयार हैं। सुबह से ही लोगों का गांधी मैदान पहुंचना शुरू हो गया है। इधर शपथ ग्रहण को लेकर नालंदा में राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है। यहां तीन बड़े चेहरे मंत्री श्रवण कुमार, डॉ. सुनील कुमार और पूर्व मंत्री हरिनारायण सिंह भी मंत्री पद की रेस में पूरी ताकत से दौड़ रहे हैं। सवाल एक ही है- ‘नालंदा का असली तुर्रम खान कौन?’ 79 वर्षीय हरिनारायण सिंह ने उम्र को मात देकर लगातार 10वीं बार जीत का परचम लहराया है।
जदयू के वरिष्ठ चेहरों में उनकी पकड़ और प्रभाव निर्विवाद है। हरनौत से जीतने वाले सिंह के अनुभव को पार्टी की मजबूती माना जाता है। उनके समर्थकों का तर्क है ‘काम बोलता है, उम्र नहीं!’ ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में अपनी पहचान बना चुके श्रवण कुमार एक बार फिर मंत्री पद की दावेदारी में मजबूत स्थिति में हैं। जदयू में उनका भरोसा, संगठन में पकड़ और नालंदा के विकास को लेकर उनकी छवि उन्हें रेस में आगे खड़ा करती है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि नई कैबिनेट में अनुभव और स्थिरता दोनों पर जोर रहेगा, जहां श्रवण कुमार सहज रूप से फिट बैठते हैं। भाजपा की ओर से वर्तमान जलवायु एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. सुनील कुमार इस बार सत्ता के समीकरण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पहली बार नालंदा से भाजपा को बड़ा आधार देने वाले सुनील कुमार को पार्टी का ‘नया लेकिन प्रभावी चेहरा’ माना जा रहा है। बीजेपी इस बार अनुभवी और युवा चेहरों का संतुलन साधने में जुटी है और डॉ. सुनील कुमार उसी रणनीति के प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। एनडीए नेतृत्व सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान दे रहा है। जदयू और भाजपा दोनों अपने-अपने विधायक दलों में नेता चुन चुके हैं। नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी इस नई राजनीतिक ‘फिल्म’ के मुख्य किरदार हैं, जिनकी अंतिम सहमति पर ही नालंदा के तीनों दावेदारों का भविष्य निर्भर है।







