
औरंगाबाद। बिहार सरकार अवैध खनन और बालू-पत्थर की तस्करी पर रोक लगाने के लिए खनन पुलिस के गठन की तैयारी कर रही है। खान एवं भूतत्व तथा कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि खनन पुलिस के गठन से अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आएगी और विभाग को छापेमारी, जांच तथा गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई के लिए अलग पुलिस बल उपलब्ध हो सकेगा।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में पुलिस बल पर कई तरह की जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में खनन विभाग की कार्रवाई के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने में कई बार समय लग जाता है। खनन पुलिस के गठन और बहाली के बाद इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। इससे अवैध खनन और खनिजों की तस्करी के मामलों में कार्रवाई अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि अवैध खनन और खनन नियमों के उल्लंघन पर निगरानी के लिए सरकार तकनीक का भी इस्तेमाल करेगी। इसके तहत खनन घाटों पर धर्मकांटा लगाए जाएंगे। साथ ही कैमरों और ड्रोन के माध्यम से खनन क्षेत्रों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इससे खनन स्थलों पर होने वाले कामकाज की निगरानी आसान होगी और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
डॉ. चंद्रवंशी ने कहा कि तकनीकी निगरानी के माध्यम से खनन गतिविधियों को व्यवस्थित करने के साथ सरकार के खनन राजस्व में भी वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण को विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
मंत्री ने राज्य में पत्थर उद्योग को दोबारा शुरू करने की योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रोहतास, औरंगाबाद, नवादा और जमुई सहित अन्य जिलों में पत्थर खनन फिर से शुरू किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता बढ़ेगी, विकास कार्यों को गति मिलेगी और राज्य सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होने की संभावना है।
कला एवं संस्कृति विभाग की योजनाओं का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि बिहार में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में 19 करोड़ रुपये की लागत से अटल कला भवन बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इन भवनों के माध्यम से स्थानीय कला, संस्कृति और कलाकारों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।






