पटना: बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से पहचाने जाने वाले बाहुबली नेता अनंत सिंह की संभावित रिहाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हाल ही में एक मामले में उन्हें राहत मिलने के बाद समर्थकों में उत्साह जरूर बढ़ा है, लेकिन कानूनी रूप से उनकी राह अब भी आसान नहीं मानी जा रही। सवाल यह है कि क्या अनंत सिंह जेल से बाहर आ पाएंगे और क्या वे बिना विधानसभा की शपथ लिए पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा कर सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अनंत सिंह के खिलाफ हत्या, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। किसी एक केस में राहत मिलने का मतलब यह नहीं है कि उनकी रिहाई तय हो गई है। जब तक वे सभी मामलों में जमानत पर बाहर नहीं आते या बरी नहीं होते, तब तक जेल से रिहाई संभव नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी भी मामले में उन्हें दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उनकी विधायकी पर सीधा असर पड़ सकता है और सदस्यता समाप्त होने का खतरा बन सकता है।
विधानसभा की शपथ को लेकर भी स्थिति जटिल है। अनंत सिंह चुनाव जीतने के बावजूद अब तक शपथ नहीं ले पाए हैं। नियमों के मुताबिक, एक निर्वाचित विधायक को यथाशीघ्र शपथ ग्रहण करनी होती है। हालांकि, यदि कोई सदस्य जेल में बंद है, तो वह अदालत से विशेष अनुमति लेकर शपथ लेने के लिए विधानसभा आ सकता है। इसके बावजूद अब तक ऐसा नहीं हो सका है।
संविधान के अनुच्छेद 190(4) के तहत, यदि कोई विधायक बिना सदन की अनुमति के 60 दिनों तक सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सीट रिक्त घोषित की जा सकती है। लेकिन कानूनी जानकार बताते हैं कि अगर जेल में होने के कारण अनुपस्थिति की जानकारी सदन को दी जाती है और उसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो तकनीकी रूप से सदस्यता बनी रह सकती है। हालांकि, बिना शपथ लिए विधायक न तो सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकता है और न ही मतदान कर सकता है।
फिलहाल, आगे का रास्ता पूरी तरह अदालत के फैसलों पर निर्भर है। यदि अनंत सिंह को अन्य मामलों में भी जमानत मिलती है, तभी वे विधानसभा पहुंचकर शपथ ले सकेंगे। अन्यथा, यह मामला बिहार की राजनीति में एक अनोखी मिसाल बन सकता है, जहां एक निर्वाचित विधायक जेल में रहते हुए ही अपना पूरा कार्यकाल बिताने की स्थिति में होगा।







