
पटना: बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के साथ ही राज्य में औद्योगिक विकास को अभूतपूर्व गति देने का काम तेज हो गया है। नव-नियुक्त उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने मंगलवार को विभाग की पहली समीक्षा बैठक में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। उन्होंने एनडीए और महागठबंधन की सरकारों के दौरान हुए सभी निवेश प्रस्तावों (एमओयू) का संपूर्ण और विस्तृत विवरण तलब किया है, जिसका कुल अनुमानित मूल्य ₹3 लाख करोड़ से अधिक है। मंत्री डॉ. जायसवाल ने उद्योग निदेशालय की समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी निवेशक के आवेदन में अनावश्यक विलंब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने निवेशकों को वास्तविक ‘वन-स्टॉप क्लियरेंस’ का अनुभव देने पर जोर दिया।
इसके लिए उन्होंने दो प्रमुख निर्देश दिए। प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की जाए ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता रहे। विभाग के पोर्टल को ऐसी व्यवस्था से मजबूत किया जाए, जिससे सभी संबंधित विभाग समयबद्ध तरीके से जवाब दें और निवेशक को भटकना न पड़े। उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता ने बैठक में एसआईपीबी (SIPB) और औद्योगिक नीतियों की कार्यप्रणाली पर विस्तृत जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि बिहार की औद्योगिक नीति 2016 और बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 अभी भी प्रभावी हैं। इसके अलावा, राज्य की विशेष नीतियाँ—जैसे टेक्सटाइल एवं लेदर नीति, एथनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति और लॉजिस्टिक नीति—की प्रगति पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल द्वारा माँगा गया यह विवरण पिछले तीन उद्योग मंत्रियों के कार्यकाल में हुए रिकॉर्ड निवेश प्रस्तावों को कवर करेगा, जो बिहार में निवेश के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। शाहनवाज हुसैन, इनके कार्यकाल में उद्योग विभाग ने पेशेवर तरीके से काम करना शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप ₹39,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। समीर महासेठ के कार्यकाल में तेजतर्रार आईएएस अफसर संदीप पौंड्रिक के नेतृत्व में आयोजित बिहार इन्वेस्टर कनेक्ट में अदानी ग्रुप समेत अन्य कंपनियों ने ₹50,530 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए। नीतीश मिश्रा के नेतृत्व में विभाग ने सीईओ की तरह काम किया। उनके कार्यकाल में आयोजित निवेशक सम्मेलन में रिकॉर्ड ₹1.81 लाख करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।






