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सनातन धर्म में मूर्ति पूजा का गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व : लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी

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Idol worship has deep spiritual and philosophical significance in Sanatana Dharma: Lakshmiprapanna Jeeyar Swami

रोहतास (सासाराम)। फजलगंज स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर परिसर में शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा का पावन आयोजन वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा-अर्चना कर पुण्य के भागी बने। मंदिर परिसर पूरे दिन भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा। इस अवसर पर श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज का भी आगमन हुआ। उनके मंदिर परिसर में पहुंचते ही श्रद्धालुओं और आयोजकों ने पुष्पमालाओं से उनका भव्य स्वागत किया।

स्वामी जी के आगमन से कार्यक्रम का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ गया और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। अपने प्रवचन में स्वामी जी महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राण प्रतिष्ठा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से मूर्ति में दिव्य चेतना का संचार किया जाता है। वैदिक मंत्रों और विधि-विधान के साथ जब देव प्रतिमा की स्थापना होती है, तब वह स्थान अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन जाता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में मूर्ति पूजा का गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व है। मूर्ति के माध्यम से भक्त भगवान का साक्षात स्वरूप मानकर उनकी आराधना करते हैं। इससे भक्त और भगवान के बीच भक्ति, विश्वास और श्रद्धा का संबंध और अधिक मजबूत होता है।

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स्वामी जी ने अपने संबोधन में वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैदिक परंपरा में देवताओं की स्थापना और उपासना का वर्णन मिलता है। उन्होंने बताया कि वेद हमें ईश्वर की आराधना और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में धर्म, संस्कार और आध्यात्मिकता का प्रसार होता है तथा समाज में आपसी एकता और सद्भाव की भावना भी सुदृढ़ होती है। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन होता रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस पावन आयोजन में शामिल हुए। इस अवसर पर संकट मोचन हनुमान मंदिर के आचार्य जनार्दन दुबे, शिव नारायण तिवारी, अक्षयबर शाह, गुरु जी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया और सभी ने भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

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