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एमएलए को कमीशन से नई कार लेने को कहता था’, मांझी ने रेट का भी किया खुलासा

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'I used to ask the MLA to buy a new car with commission', Manjhi also revealed the rate.

गयाजी: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अपने नए और सनसनीखेज बयान से NDA को असहज स्थिति में डाल दिया है। जीतन राम मांझी ने दावा किया है कि सभी सांसद और विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र के डेवलपमेंट फंड में कमीशन लेते हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) सुप्रीमो मांझी ने आगे दावा किया कि उन्होंने कई बार पार्टी को अपना कमीशन दिया था और पार्टी नेताओं को सलाह दी थी कि वे उस पैसे का इस्तेमाल कार खरीदने के लिए करें। जीतन राम मांझी ने हाल ही में HAM के एक कार्यक्रम में ये बयान दिया है। जीतन राम मांझी ने विधायकों से कहा कि अगर उन्हें 10% कमीशन नहीं मिल पा रहा है, तो 5% तो ले ही लें। उन्होंने आगे कहा, ‘हर सांसद और विधायक कमीशन लेता है और एक रुपये में से 10 पैसे भी लेना एक बड़ी रकम है।’ गया जी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले श्री मांझी ने कहा, ‘मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बार अपनी कमीशन राशि पार्टी कोष में दी है।

एक सांसद को 5 करोड़ रुपये मिलते हैं, और अगर उसे 10% कमीशन मिलता है, तो यह 40 लाख रुपये हो जाएगा।’ एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार जीतन राम मांझी यहीं नहीं रुके, यहां तक कहा कि उन्होंने अपने बेटे और पार्टी अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन, जो राज्य में कैबिनेट मंत्री हैं, से भी कमीशन लेने को कहा, क्योंकि यह कोई रहस्य नहीं था और हर कोई ऐसा करता था।’ अपने बेटे की ओर देखते हुए मांझी ने कहा, ‘अगर ये लोग [पार्टी नेता] ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो यह पार्टी अध्यक्ष की गलती है।’ उन्होंने घोषणा की कि आगामी विधानसभा चुनाव में HAM को 100 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए और यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। जीतन राम मांझी ने अपने बेटे को लक्ष्य हासिल करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने को कहा और बताया कि उनकी जाति के लोग इसका समर्थन करेंगे, हालांकि HAM को कुछ और जातियों के समर्थन की भी आवश्यकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए की सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें कम आंककर गलती की है। जीतन राम मांझी ने कहा कि ‘पूर्णिया, मगध और मुंगेर डिवीजनों में हम कोई साधारण पार्टी नहीं हैं। पश्चिम चंपारण में भी हमारे समर्थक हैं। हमारी पार्टी हर जगह मजबूत है, लेकिन भाजपा ने हर चुनाव में हमें कम आंका है।

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अब तक जो हुआ है, वह ठीक है। अगर अगले चुनाव में हमें महत्व नहीं दिया गया, तो हम अपना अलग रास्ता अपनाएंगे।’ कुछ दिनों पहले, जीतन राम मांझी के भाषण का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना गया था कि 2020 के विधानसभा चुनाव में, उन्होंने अपने टिकारी उम्मीदवार को, जो 2,700 वोटों से पीछे चल रहे थे, गया जी के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट के समर्थन से जीत दिलाने में मदद की थी। ये कोई पहली बार नहीं है जब बेबाकी से जीतन राम मांझी ने ऐसे बयान दिए हैं। इससे पहले मांझी ने 2015 में मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद बिहार में एस्टीमेट घोटाले का जिक्र कर बहस छेड़ दी थी। तब मांझी ने कहा था कि सरकारी ठेकों में जमकर एस्टीमेट घोटाला किया जाता है। ठेकों में पैसा बनाने के लिए एस्टीमेट को जान बूझ कर बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है। हाल ही में राज्यसभा सीट की उनकी मांग पूरी न होने पर गठबंधन से बाहर निकलने की उनकी टिप्पणी ने भी हलचल मचा दी थी। मंत्री और भाजपा नेता दिलीप कुमार जायसवाल ने जीतन राम मांझी की टिप्पणी को उनकी निजी राय बताया है। वहीं विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। RJD के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि विधानसभा चुनाव में 202 सीटें जीतने के बावजूद एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं है।

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