
छपरा: बिहार विधानसभा में मंगलवार को उस समय राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई, जब पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की रिहाई की मांग सदन के भीतर जोरशोर से उठी। यह मांग भाजपा विधायक देवेशकांत सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान उठाई, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विधायक देवेशकांत सिंह ने कहा कि प्रभुनाथ सिंह को एक साजिश के तहत फंसाया गया है और उनका मामला वर्षों से लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिशोध के कारण पूर्व सांसद को जेल में रखा गया है, जबकि कई मामलों में साक्ष्य कमजोर हैं।
देवेशकांत सिंह ने सदन में कहा कि प्रभुनाथ सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में क्षेत्र के विकास के लिए अहम भूमिका निभाई है और उनके समर्थकों में आज भी भारी नाराजगी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और यदि संभव हो तो कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाकर पूर्व सांसद को राहत दी जाए। भाजपा विधायक का यह बयान सामने आते ही विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया और इसे न्यायिक प्रक्रिया में दखल बताया।
विपक्षी सदस्यों का कहना था कि किसी भी आरोपी की रिहाई का फैसला अदालत का अधिकार क्षेत्र है, न कि विधानसभा का। उन्होंने सरकार पर दबाव बनाने और न्यायपालिका को प्रभावित करने का आरोप लगाया। इस पर सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने कहा कि वे केवल जनभावनाओं को सदन के माध्यम से सामने रख रहे हैं, न कि अदालत के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं।
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से संयम बरतने की अपील की और कहा कि सदन में किसी भी न्यायिक मामले पर टिप्पणी करते समय संवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया जाना चाहिए। अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। माना जा रहा है कि इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर पुराने मामलों और नेताओं की भूमिका को लेकर बहस तेज हो सकती है।






