पटना: बिहार विधान परिषद पिछले दो दिनों से जबरदस्त राजनीतिक घमासान का केंद्र बना हुआ है। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद सदन का माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने मुख्यमंत्री पर खराब व्यवहार का आरोप लगाते हुए उनसे माफी की मांग की। मंगलवार को भी यही मुद्दा छाया रहा और विपक्ष ने सदन के अंदर और बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब राजद और जदयू के एमएलसी आमने-सामने आ गए। हंगामे के दौरान राजद सदस्य वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन शोर-शराबा थमता नहीं दिखा। इसी बीच मंत्री अशोक चौधरी और राजद एमएलसी सुनील सिंह के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई। मामला इतना बढ़ा कि आवाजें प्रेस दीर्घा तक सुनाई देने लगीं।
सत्ता पक्ष ने सुनील सिंह पर अभद्र भाषा और असंसदीय आचरण का आरोप लगाया। मंत्री मंगल पांडेय और दिलीप जायसवाल ने विपक्ष पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। हंगामे के बाद सभापति ने पूरे विपक्ष को एक दिन के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।
अशोक चौधरी ने आरोप लगाया कि उन्हें गालियां दी गईं और दलित नेता होने के कारण निशाना बनाया गया। वहीं सुनील सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है और उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
सभापति ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि सुनील सिंह के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।







