जमुई: बिहार के जमुई में अडानी समूह को 1050 एकड़ सरकारी जमीन मात्र 1 रुपये प्रति एकड़ सालाना किराये पर 33 साल के लिए देने के फैसले के विरोध में सोमवार को भाकपा (माले) ने जमुई कचहरी चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन किया गया। कार्यकर्ताओं ने सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों पर तीखा हमला बोला।
प्रतिवाद सभा की अध्यक्षता माले के युवा नेता बाबू साहब सिंह ने की। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार गरीब भूमिहीनों को रहने के लिए जमीन नहीं देती, लेकिन अडानी समूह को सिर्फ 1 रुपये प्रति एकड़ सालाना पर हजारों एकड़ जमीन सौंप रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने 6 रुपये प्रति यूनिट की दर से अडानी समूह से बिजली खरीदने का करार किया है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। माले नेताओं ने कहा कि हाल ही में सरकार ने करीब 2600 स्कूलों का विलय कर दिया, जिनमें ज्यादातर गरीब और दलित इलाकों के स्कूल शामिल थे।
सवाल यह है कि जब स्कूल और अस्पताल के लिए जमीन की जरूरत होती है, तब सरकार जमीन की कमी का बहाना बनाती है, लेकिन कॉरपोरेट घरानों को रियायती दर पर जमीन देने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाती। यह नीति सरकार के पूंजीपतिपरस्त रवैये को साफ दर्शाती है। इस मौके पर माले नेता मनोज कुमार पांडेय, बासुदेव रॉय, राहुल यादव, कल्लू मरांडी, कंचन रजक, नितेश्वर आजाद, मोहम्मद हैदर, किरण सहित बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने मांग की कि सरकार अडानी को दी गई जमीन की लीज रद्द करे और गरीबों, किसानों व सार्वजनिक जरूरतों के लिए जमीन उपलब्ध कराए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए – कॉरपोरेट परस्त सरकार मुर्दाबाद और भूमिहीनों को जमीन दो।







