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राज्यसभा जंग में चिराग की मां व नितिन नबीन के नाम चर्चा में, क्या राजद का कटेगा पत्ता?

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Chirag's mother and Nitin Nabin's names are in discussion in the Rajya Sabha battle, will RJD be eliminated?

पटना: बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। बीजेपी और जेडीयू के बीच लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान को उच्च सदन भेजने की तैयारी में दिख रहे हैं। वर्तमान में चिराग की पार्टी के पास 19 विधायक हैं, जो राज्यसभा की एक सीट के लिए आवश्यक 41 वोटों के आधे से भी कम है। हालांकि, एनडीए के पास अपनी चार सीटें सुरक्षित करने के बाद लगभग 38 अतिरिक्त वोट बच रहे हैं। चिराग पासवान इस पांचवीं सीट पर अपनी मां के लिए दावा ठोक रहे हैं। यदि एनडीए नेतृत्व इस पर सहमत होता है, तो चिराग पासवान को जीत के लिए विपक्षी खेमे या निर्दलीयों से 3 अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा। यह चिराग के राजनीतिक कौशल और एनडीए में उनके रसूख की बड़ी परीक्षा होगी। बिहार से राज्यसभा के पांच सांसदों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है।

जिन नेताओं की विदाई हो रही है उनमें आरजेडी के प्रेमचंद्र गुप्ता और एडी सिंह, जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह (उपसभापति), रामनाथ ठाकुर (केंद्रीय मंत्री) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। बिहार विधानसभा की 243 सीटों के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट की आवश्यकता होगी। भाजपा (89 विधायक) और जदयू (85 विधायक) के पास अपने दो-दो उम्मीदवारों को आसानी से जिताने का संख्या बल है। लेकिन इस नए समीकरण में राजद के लिए अपनी एक भी सीट बचा पाना बेहद कठिन दिख रहा है, क्योंकि बहुमत एनडीए के पाले में है। बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नबीन अब बिहार की सक्रिय राजनीति से ऊपर उठकर दिल्ली का रुख कर सकते हैं। भाजपा में अक्सर राष्ट्रीय अध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभालने वाला नेता संसद (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होता है।

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नितिन नबीन ने हाल ही में मंत्री पद से इस्तीफा दिया है। चर्चा है कि वो राज्यसभा जा सकते हैं, जिससे उनका कद राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगा। भोजपुरी स्टार पवन सिंह को लेकर भी अटकलें तेज हैं। विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा के लिए जोरदार प्रचार करने वाले पवन सिंह को पार्टी किसी बड़े पद या राज्यसभा सीट से नवाज सकती है। सांसद मनोज तिवारी के बयानों ने इन चर्चाओं को और बल दिया है कि पवन सिंह के लिए पार्टी ने कुछ बड़ा सोच रखा है। नीतीश कुमार आमतौर पर किसी नेता को दो बार से ज्यादा राज्यसभा नहीं भेजते हैं। हालांकि, हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर दोनों ही सीएम के बेहद भरोसेमंद और पार्टी के वरिष्ठ चेहरे हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार अपनी परंपरा तोड़कर इन्हें तीसरी बार मौका देते हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास मात्र 4 विधायक हैं, ऐसे में बीजेपी की ओर से उन्हें दोबारा मौका मिलने की उम्मीद कम है।

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