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गया टाउन सीट पर BJP का अजेय रिकॉर्ड बरकरार, विपक्ष के लिए मुश्किल चुनौती

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BJP maintains unbeaten record in Gaya Town seat, tough challenge for opposition

गयाजी: गयाजी में गया टाउन विधानसभा की राजनीति फल्गु नदी के किनारे बसे विष्णुपद एरिया से प्रभावित होती है। विष्णुपद मंदिर के पास ही एक-दो किलोमीटर के दायरे में पंडाओं के 1400 से ज्यादा घर हैं। सुबह से ही यहां चहल पहल शुरू हो गई है। मंदिर के पास ही कई धर्मशालाएं हैं और सुबह ही दुकानें भी सज गई हैं। विष्णुपद मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, यहां विष्णु के पवित्र पदचिन्ह हैं और पूर्वजों के लिए पिंडदान करने दूर दूर से लोग यहां आते हैं। कहा जाता है कि यहां भगवान राम और सीता ने महाराजा दशरथ का पिंडदान किया था। चुनाव को लेकर बात करने पर यहां ज्यादातर लोगों ने एक ही लाइन में जवाब दिया- हमारे लिए तो बीजेपी और मोदी जी हैं। ये यहां के अब तक के चुनावी नतीजों में भी दिखता है। गया टाउन की सीट पर कांग्रेस आखिरी बार 1985 में जीती थी। 1990 से लगातार यहां बीजेपी जीत रही है।

बीजेपी के प्रेम कुमार यहां से तब से ही लगातार विधायक हैं। कमल लाल पारिक कहते हैं कि हम क्यों बदलाव चाहेंगे, हमारे लिए सब अच्छा ही हुआ है। ऐसे ही कोई इतने साल से लगातार थोड़ी जीतता है। रेलवे स्टेशन देखो, फ्लाईओवर देखो सब अच्छा तो हुआ है। विपक्ष की बात करने पर वह कहते हैं कि विपक्ष का काम ही विरोध करना है। वैसे इलाके में सफाई की स्थिति को लेकर कई लोगों ने चिंता जताई। एक बुजुर्ग ने कहा कि तारीफ तो ठीक है लेकिन सफाई की स्थिति भी तो देखो। अब लोग सफाई के लिए भी सरकार से गुहार करेंगे क्या। फिर बार-बार बीजेपी कैसे जीत रही है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का अपना प्रभाव तो होता है। नरेश प्रताप कहते हैं कि हमारे बच्चे जिसे कहेंगे वहां वोट दे देंगे। पहले हम खुद से सोचते थे, पर अब हमारा वक्त तो गया, आगे का भविष्य बच्चों को देखना है। वह बताते हैं कि मेरी पोती दिल्ली में कोचिंग कर रही है, लेकिन वोट देने आएगी। वह जिसे कहेगी हमारा परिवार तो उसे ही वोट देगा।

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चुनाव के ऐलान से काफी वक्त पहले से ही बीजेपी सहित दूसरी पार्टियों ने प्रवासियों से संपर्क अभियान शुरू कर दिया था। दिल्ली की बात करने पर रामाधार सिंह ने कहा कि 2015 में मैं भी केजरीवाल के लिए दिल्ली में प्रचार करने गया था। तब उन्होंने कहा था कि देशभक्त लोग आएं और प्रचार करें। उन्होंने कहा कि मुझे तो तब दिल्ली में साफ अंडरकरंट दिख रहा था केजरीवाल का। क्या केजरीवाल की तरह का माहौल बिहार में प्रशांत किशोर के लिए है? ये पूछने पर वह कहते हैं कि उनका माहौल तो बन रहा है पर जमीन पर कुछ खास नहीं है। हालांकि ये भी जोड़ते हैं कि ब्राह्मण भीतरखाने उन्हें सपोर्ट कर सकते हैं। यहां भी चर्चा घूमफिर कर फिर जाति पर आ टिकती है। वह कहते हैं कि जैसे यादव समाज के लोग आरजेडी को कभी नहीं छोड़ते वैसे ही सब अपनी जाति के साथ ही जाता है ना। क्या इस सीट पर यादव वोटर कम हैं, क्यों बीजेपी लगातार जीत रही है, इस सवाल पर वह किस जाति के कितने वोटर हैं उसका हिसाब गिनाने लगते हैं। साथ ही कहते हैं कि 40 पर्सेंट एक तरफ हो जाएगा तब भी 60 पर्सेंट के आगे तो जीत नहीं पाएगा ना।

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