
नई दिल्ली: राजद नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव द्वारा ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम काटे जाने के आरोपों के बाद अब उनके पास वोटर कार्ड होने का मुद्दा गरमा गया है। तेजस्वी ने शनिवार को दावा किया है कि बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है। जिसका खंडन करते हुए चुनाव आयोग ने उनका लिस्ट में शामिल होने का सबूत दिया था। इस घटना में नया मोड़ तब आया जब तेजस्वी यादव की ओर से बताया गया ईपीआईसी नंबर (RAB2916120) और चुनाव आयोग की ओर से जारी ईपीआईसी नंबर (RAB0456228) दोनों अलग-अलग थे। इसके बाद ये आशंका जताई गई है, कि तेजस्वी यादव के नाम के दो वोटर कार्ड हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि तेजस्वी यादव ने 2020 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के लिए जो हलफनामा भरा था, उसमें उन्होंने ईपीआईसी नंबर RAB0456228 का इस्तेमाल किया था।
यही ईपीआईसी नंबर 2015 की मतदाता सूची में भी मौजूद था और हाल ही में जारी की गई मसौदा सूची में भी उनका नाम इसी नंबर के साथ है। सूत्रों ने कहा कि आयोग को आशंका है कि तेजस्वी के पास दो ईपीआईसी नंबर हैं और इसकी जांच कराई जाएगी। सूत्रों ने कहा कि यह पूरी तरह संभव है कि दूसरा ईपीआईसी (चुनाव फोटो पहचान पत्र) कभी भी आधिकारिक माध्यम से नहीं बनाया गया हो। आयोग सूत्रों ने तेजस्वी प्रसाद के इस आरोप को खारिज कर दिया कि उनका ईपीआईसी नंबर बदल दिया गया था। उन्होंने कहा कि राजद नेता ने 2020 में हलफनामे पर अपना नामांकन पत्र भरने के लिए ईपीआईसी नंबर RAB0456228 के साथ मतदाता सूची का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि अन्य ईपीआईसी संख्या RAB2916120 अस्तित्वहीन पाई गई है। 10 वर्षों से अधिक के रिकार्ड की जांच की गई है, तथा यह समझने के लिए आगे जांच की जा रही है कि क्या यह जाली दस्तावेज है। एक अधिकारी ने कहा, संभव है कि यह दूसरा कार्ड कभी आधिकारिक प्रक्रिया से बनाया ही नहीं गया हो।
इसकी असलियत पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि यह नंबर कहीं फर्जी दस्तावेज तो नहीं है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया था। उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मेरा नाम मतदाता सूची में नहीं है। मैं चुनाव कैसे लड़ूंगा? तेजस्वी ने चुनाव के एप को दिखाते हुए कहा कि उनके ईपीआईसी नंबर को सर्च करने पर उनका नाम मतदाता सूची में नहीं आ रहा है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने तुरंत ही तेजस्वी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकतंत्र में हर मतदाता की उपस्थिति और अधिकार की गारंटी सर्वोपरि है। यदि मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं और उसके पीछे का कारण छुपाया जा रहा है, तो यह गंभीर लोकतांत्रिक संकट है और जनता के मताधिकार पर सीधा हमला है। तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद इस षड्यंत्र का सक्रिय विरोध करेगा और हर मंच पर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करेगा। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि चुनाव आयोग ने जिन 65 लाख मतदाताओं के नाम विलोपित किए है उससे संबंधित हमारे कुछ वाजिब एवं तार्किक सवाल है। क्या चुनाव आयोग इसका बिंदुवार जवाब देगा?






