
पटना: बिहार की राजधानी पटना में यह पहली घटना थी, जब बेखौफ अपराधी अपना चेहरा दिखाते हुए बड़े आराम से एक बड़े अस्पताल के अंदर घुसकर इलाजरत मरीज की हत्या की। हत्या कुख्यात चंदन मिश्रा (34) की हुई, जो जेल से पैरोल पर निकला था। घटना को अंजाम देने के बाद 6 अपराधी दो बाइक पर सवार होकर ख़ुशी का इजहार करते हुए आराम से फरार हो गए। तस्वीर में ऐसा दिख रहा है मानो उन्होंने कोई जंग जीती हो। यह घटनास्थल पुलिस मुख्यालय से लगभग उतना ही करीब है, जितना पटना हवाई अड्डा से। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी पहुंची और फिर जांच-पड़ताल, पूछताछ और एफएसएल टीम के द्वारा जांच किए जाने के पूरे तामझाम किए गए। रात तक यह भी स्पष्ट हो गया कि इस को अंजाम देने वाला शख्स कौन है।
वह शख्स खुद को ‘बादशाह‘ कहलाने पर गर्व महसूस करता है, और शायद इसी वजह से उसने जानबूझकर अपने चेहरे को दिखाते हुए इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया। घटना के कुछ घंटों के अंदर पारस अस्पताल में चंदन मिश्रा हत्या कांड का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ गया है, जिसमें यह दिख रहा है कि पांच अपराधी बड़े आराम से पारस अस्पताल के अंदर कमरे में प्रवेश करते हैं और फिर फायरिंग कर बाहर निकल गये। साथ ही उनके जाने का भी सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें दो बाइक पर तीन-तीन अपराधी हथियार लहराते हुए दिख रहे हैं। घटना करने के बाद ये 6 अपराधी पारस अस्पताल से सटी गली से निकलते हुए बड़े आराम से अपने गंतव्य की ओर निकल गए। अपराधी जिस रास्ते से फरार हुए, वह रास्ता भी सीसीटीवी में कैद हो चुका है। सीसीटीवी के तहत अपराधी समनपुरा मस्जिद होते हुए दीघा से आशियाना रोड और फिर फुलवारी गुमटी पार करते हुए फरार हो गए। इस घटना ने बिहार पुलिस को यह बताया कि अपराधी कितने बेखौफ हैं कि उन्हें पहचान लिए जाने का भी भय नहीं था।
उनके दिलों में पुलिस का भय रत्ती भर भी नहीं है। घटनास्थल तक पुलिस के अलावा कोई और नहीं पहुंच पाया, इसलिए गोलियों की संख्या स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। शुरुआती समय में यह कहा जा रहा था कि अपराधियों ने उन्हें चार गोलियां मारी हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और हैं। चंदन मिश्रा को 4 नहीं 36 गोलियां मारी थी। ‘अमर उजाला’ ने मृतक के एक बहुत ही नजदीकी से बातचीत की, जिसमें उन्होंने यह बताया कि अपराधियों ने कुख्यात चंदन मिश्रा पर कुल 36 गोलियां बरसाईं। कंधा से लेकर पैर तक कुल 32 गोलियां लगी थीं। अपराधियों ने फ़िल्मी स्टाइल में कंधे से लेकर पैर तक कोई ऐसी जगह नहीं छोड़ी थी, जहां गोलियां नहीं मारी। इस मामले पर पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने भी माना कि यह हत्याकांड पूरी तरह सुनियोजित थी, इसलिए उन्होंने यह कहा कि इस मामले में बाहरी और आंतरिक (अस्पताल से जुड़े) लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। उन्होंने तो हत्यारों तक बहुत जल्द पहुंच जाने का भी दावा किया, लेकिन सार्वजनिक रूप से पुलिस के हाथ अब तक खाली दिख रहे हैं।
हालांकि पटना एसएसपी ने यह कहा कि हमने तकनीकी और मानव खुफिया स्रोतों से जो सुराग इकट्ठा किए हैं, उनके आधार पर हम बहुत जल्द हत्यारों तक पहुंचने वाले हैं। मिली जानकारी के मुताबिक़ पुलिस ने इस मामले में उस शख्स को हिरासत में लिया है, जो लोगों के द्वारा बादशाह कहने पर खुश होता है। अब आप इस तस्वीर को भी देखिये, जिसमें सीसीटीवी में दिखने वाला शख्स पोस्टर में दिख रहा है। यह फुलवारी शरीफ का रहने वाला शिक्षिका का पुत्र तौसिफ खान है। पशुपति कुमार पारस की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राष्ट्रीय) में तौसिफ की तस्वीर के दो मतलब हो सकते हैं। यह या तो पशुपति कुमार पारस की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) में शामिल हो चुका था या फिर शामिल होने वाला था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन पोस्टर में दिख रही तस्वीर यह जरूर बता रही है कि तौसिफ खान भी अपराध की दुनिया से गुजरते हुए अब राजनीति में भी कदम रखने वाला था। ‘अमर उजाला’ ने जिस बादशाह की चर्चा की थी वह कोई और नहीं बल्कि तौसिफ खान ही है, जिसका पूरा नाम तौसीफ खान बादशाह है।






