कटिहार: कटिहार के बारसोई के प्रखंड विकास पदाधिकारी हरिओम शरण ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कटिहार के जिलाधिकारी मनेष कुमार मीणा को पांच पन्नों का पत्र और अपना इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने एसडीओ श्वेतम दीक्षित पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा कि मैं कमर दर्द से जूझते हुए भी रोज 10 से 12 पंचायतों का दौरा करता हूं। डिजिटाइजेशन कैम्प का निरीक्षण करता हूं। बीएलओ, सुपरवाइजर से लेकर अपलोडिंग तक की जिम्मेदारी उठाता हूं। इसके बावजूद एसडीओ सर मुझे खुले आम कर्मचारियों के सामने अपमानित करते हैं। अपशब्द का प्रयोग करते हैं। कामचोर बता कर दबाव बनाते हैं।
इतना ही डीएम को लिखे पत्र में बीडीओ हरिओम शरण ने लिखा कि प्रखंड और विधानसभा की इस कार्य की प्रगति पर निर्वाचन आयोग की ओर से गई वीसी में भी कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की गई है। लेकिन, एसडीओ बार-बार मुझे डांट फटकार लगाते हैं। कहते हैं कि आप काम नहीं करते हैं। कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके लिए डीएम सर और आयोग को कार्रवाई के लिए लिख देंगे। नौकरी चला जाएगा, तब पता चलेगा। बीडीओ ने कहा कि विगत कई दिनों से एप पर साइट काफी धीमी गति से काम कर रहा है। आयोग ने भी इसे स्वीकार किया। साथ पिछले दिनों 24 घंटे इंटरनेट सेवा बाधित रहने से भी फर्क पड़ा।
लेकिन, इन सब चीजों का दोष भी एसडीओ सर ने मेरे ऊपर मढ़ दिया। कहा जाता है कि आपके कारण मतदाता पुनरीक्षण कार्य काफी धीमी गति से हो रहा है। बीडीओ ने अपने पत्र में लिखा कि बेवजह लगातार इस प्रकार की मानसिक प्रताड़ना में और इस प्रकार की अपमानजनक परिस्थितियों में जहां बिना किसी जायज कारण के बार-बार सभी अन्य अधिकारियों व कनीय कारण के बार-बार सभी अन्य अधिकारियों व कनीय कर्मियों के समक्ष मेरे साथ अपमानजनक व्यवहार हो रहा हो, मैं कुशलता पूर्वक व स्वस्थ्य मानसिक स्थिति में कार्य करने में स्वयं को अपने ही आत्मसम्मान के साथ संघर्ष करता पाता हूं। इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं।
असली मसला यह है कि जिन पर यह आरोप लगे हैं, वह कोई मामूली अफसर नहीं, बल्कि जदयू विधायक विजय सिंह के दामाद हैं। अब समझिए सियासत में बवाल क्यों मचा है।विपक्ष ने इसे सत्ता का दंभ और रिश्तेदारी का रौब बताकर हमला तेज कर दिया है। वहीं इस मामले में एसडीओ श्वेतम दीक्षित ने दो टूक कहा कि यह सब जिला प्रशासन के निर्देशों के तहत हो रहा है और प्रदर्शन सुधारने के लिए बीडीओ को केवल काम समझाया गया था। अब यदि उसे प्रताड़ना कहें तो क्या करें? मेरे ऊपर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं।







