सासाराम (रोहतास) ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी व यूजीसी रेगुलेशन समता आंदोलन की ओर से सर्किट हाउस सासाराम में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आर वाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व विधायक डुमरांव अजीत कुशवाहा ने कहा कि भारतीय समाज व्यवस्था में वर्ण-जाति के आधार पर विशेषाधिकार व भेद-भाव की संस्कृति, विचार, व्यवहार, शोषण, अत्याचार एक वास्तविक सच्चाई है और यह यूजीसी रेगुलेशन 2026 का विरोध करने वाले लोगों ने अपने वर्चस्ववादी, जातिवादी मानसिकता से साबित भी कर दिया है। आंकड़े के मद्देनजर आज भी समाज और व्यवस्था में मनुवादी वर्ण -जाति की श्रेष्ठता व वर्चस्व कायम है। इस गैरबराबरी के वजह से दलित, पिछड़े, वंचित, शोषित वर्ग के साथ जातिगत भेद-भाव,शोषण-उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं.यूजीसी के मुताबिक ही इस तरह की घटनाओं में 118% की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे सैंकड़ों दलित, पिछड़े, आदिवासी छात्रों की उत्पीड़न के कारण सांस्थानिक हत्याएं हुई है। शैक्षणिक जगत में इस तरह के भेद-भाव , जुल्म, ज्यादती पर एकदम से रोक लगनी चाहिए। इस लिए यूजीसी रेगुलेशन को और सशक्त करते हुए लागू किया जाना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्य सचिव सह पूर्व विधायक शिव प्रकाश रंजन और भीम आर्म प्रदेश अध्यक्ष अमर ज्योति ने कहा कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मनुवादी ताकतों के दबाव में यूजीसी रेगुलेशन 2026 पर रोक लगा दिया है। 19 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। इस बीच देश भर में यूजीसी रेगुलेशन के समर्थन में आंदोलन जारी है। आंदोलन के इसी धारावाहिकता में 18 मार्च को 74 आंदोलन (संपूर्ण क्रांति दिवस) के ऐतिहासिक दिन को पटना में समता महाजुटान और राजभवन मार्च होने जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आइसा राज्य सचिव सबीर कुमार, आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) प्रदेश महासचिव रितेश यादव, पूर्व चेनारी विधानसभा प्रत्याशी अमित पासवान, आइसा जिला संयोजन राजेश कुमार, अम्बेडकर कल्याण छात्रावास छात्र प्रधान ज्योति कुमार, राजद नेता शिव शंकर सिंह कुशवाहा, माले नेता रवि शंकर राम , गोल्डन पासवान, अनुमंडल अध्यक्ष रोहित कुमार, मानस पटेल, अरविंद पिंटू गुरुजी,मनोज यादव समेत कई छात्र शामिल रहे।







