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डोर स्टेप हेल्थकेयर पर सवाल: बुजुर्गों को नहीं मिल रहा घर पर इलाज,अस्पतालों में लंबी कतारें

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Questions about doorstep healthcare: Elderly people are unable to access treatment at home, and long queues in hospitals.

पटना: बिहार सरकार की बुजुर्गों को घर बैठे इलाज देने की महत्वाकांक्षी ‘डोर स्टेप हेल्थकेयर’ योजना फिलहाल जमीनी स्तर पर प्रभावी होती नजर नहीं आ रही है। योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर पर ही नर्सिंग सेवा, ईसीजी, ब्लड टेस्ट और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है, ताकि उन्हें अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन राजधानी पटना के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। सोमवार को आईजीआईएमएस,पीएमसीएच और एनएमसीएच जैसे अस्पतालों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग मरीज ओपीडी के बाहर लंबी कतारों में इलाज का इंतजार करते नजर आए लखीसराय से आईं 67 वर्षीय मारो देवी पीएमसीएच में इलाज के लिए पहुंचीं। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से पेशाब की समस्या से परेशान हैं और लगातार अस्पतालों के चक्कर लगा रही हैं। सोमवार सुबह पीएमसीएच पहुंचने पर उन्हें यहां भी लंबी भीड़ का सामना करना पड़ा। इसी तरह आईजीआईएमएस पहुंची 70 वर्षीय धर्मपति देवी ने बताया कि वह सुबह सात बजे से अस्पताल के विभिन्न काउंटरों पर पर्ची कटवाने के लिए भटक रही हैं। काफी देर इंतजार के बाद पर्ची तो मिल गई, लेकिन अब डॉक्टर से मिलने के लिए ओपीडी में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

पटना के 65 वर्षीय विष्णु देव राय भी अपनी पत्नी और बेटी के साथ पीएमसीएच इलाज के लिए पहुंचे चलने-फिरने में असमर्थ राय को एक विभाग से दूसरे विभाग तक जाने में काफी परेशानी हुई। उनकी बेटी उन्हें सहारा देकर अलग-अलग काउंटरों तक ले जाती दिखी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था में सुधार की दिशा में काम किया जा रहा है। पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह के अनुसार, नए 500 बेड के अस्पताल के शुरू होते ही बुजुर्गों के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी, ताकि उन्हें एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं मिल सकें। वहीं एनएमसीएच में जेरियाट्रिक विभाग में फिलहाल केवल एक डॉक्टर कार्यरत हैं, जिसके कारण अलग ओपीडी शुरू नहीं हो पाई है। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने बताया कि फिलहाल बुजुर्ग मरीजों को सामान्य ओपीडी में ही देखा जा रहा है। आईजीआईएमएस में जेरियाट्रिक ओपीडी शुरू तो हो चुकी है, लेकिन संसाधनों की कमी बनी हुई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नया भवन पूरी तरह हैंडओवर होने के बाद बुजुर्गों के लिए आईपीडी सुविधा भी शुरू की जाएगी। फिलहाल हकीकत यही है कि योजना के बावजूद बुजुर्ग मरीजों को अस्पतालों में लंबी कतारों और असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा

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