सासाराम (रोहतास)। गुरुवार से शुरू हुए चैत्र नवरात्र के साथ ही पूरे जिले में भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। खासकर सासाराम स्थित प्रसिद्ध ताराचंडी धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह होते ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर परिसर में देखी गईं, जहां लोग माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए। कैमूर पहाड़ी की गुफा में स्थित मां ताराचंडी का यह प्राचीन धाम आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां विराजमान मां चंडी स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुई थीं।
ऐतिहासिक दृष्टि से भी इस मंदिर का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां साधु-संतों ने तपस्या की थी और यह स्थान शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। शेरशाह सूरी के काल में भी इस धाम का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक विरासत और मजबूत होती है। चैत्र नवरात्र हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह नवसंवत्सर (हिंदू नववर्ष) की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान की गई साधना और उपासना का कई गुना फल मिलता है। श्रद्धालु व्रत रखकर, पूजा-पाठ कर और भक्ति में लीन होकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
ताराचंडी धाम में भी नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। ताराचण्डी कमिटी द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां मां के दरबार में हाजिरी लगाता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। इसलिए इन्हें मंशापूर्ण देवी भी कहा जाता है। यही कारण है कि नवरात्र के अवसर पर यहां दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूरे क्षेत्र में “जय माता दी” के जयकारों के साथ आस्था का माहौल चरम पर है।







