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65 लाख वोटरों के नाम हटे, गहन पुनरीक्षण में दावा-आपत्ति पर नहीं पड़ा असर

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Names of 65 lakh voters were removed, claims and objections were not affected in the intensive revision

बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटा भारत निर्वाचन आयोग विपक्ष के निशाने पर है। बिहार में मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पूरे जुलाई महीने विपक्ष ने आयोग को परेशान किए रखा। फिर, 1 अगस्त को इस पुनरीक्षण के बाद आयोग ने जब मृत / स्थायी तौर पर मतदान क्षेत्र छोड़ जाने / क्षेत्र में नहीं रहने / दो जगह में से एक जगह के वोटर लिस्ट से हटाने की जानकारी देते हुए 65 लाख वोटरों को हटाने का एलान किया तो विपक्ष ने हमले तेज कर दिए। यह हमला ‘वोट चोरी’ के नारे तक ऐसा पहुंचा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी आयोग को इन 65 लाख वोटरों की सूची जारी करने के लिए कह दिया। चुनाव आयोग ने सोमवार 18 अगस्त को यह जारी कर दिया। लेकिन, अब सवाल है कि यह है किसके काम का? तो, सीधा जवाब है कि यह सिर्फ राजनीतिक दलों के हंगामे को शांत करने के लिए किया गया है।

कैसे, यह जानना भी रोचक है। भारत निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर बिहार के मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण में हटाए गए 65 लाख वोटरों की सूची जारी की गई है। शीर्षक है- “मतदाताओं की सूची, जिनके नाम 2025 तक बिहार मतदाता सूची में थे, लेकिन 01.08.2025 की ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हैं।” इसे देखने के लिए लिंक https://ceoelection.bihar.gov.in/index.html है। जब इस लिंक पर आगे बढ़ेंगे तो दो विकल्प आता है। पहला विकल्प वोटर कार्ड नंबर (EPIC) डालकर देखने का और दूसरा विधानसभा और भाग संख्या अनुसार सूची डाउनलोड करने का। इपिक डालकर खोजने पर किसी एक वोटर की अपडेट जानकारी दिखेगी। जबकि, दूसरे विकल्प से जाने पर बूथ के वोटरों की सूची मिलेगी।

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चुनाव आयोग ने 65 लाख वोटरों की जानकारी देने के लिए यह लिंक तो जारी कर दिया है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ राजनीतिक दलों को मिल सकता है। यह फायदा लेने के लिए राजनीतिक दलों को हर मतदान केंद्र के हटाए गए मतदाताओं की सूची डाउनलोड कर उनका भौतिक सत्यापन करना होगा। ठीक उसी तरह का, जिस तरह के सत्यापन की जिम्मेदारी विशेष गहन पुनरीक्षण में BLO को दी गई थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि BLO को जब यह काम दिया गया था, तभी से अबतक राजनीतिक दलों को इनके साथ BLA देने की छूट थी और भारी संख्या में भारतीय जनता पार्टी के साथ कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने भी ऐसे प्रतिनिधि बीएलओ के कामकाज की देखरेख में लगा रखे हैं। राजनीतिक दलों के 1,60,813 BLA की इस देखरेख के बावजूद अबतक किसी भी पार्टी ने 1 अगस्त से अब तक एक भी दावा-आपत्ति को दर्ज नहीं कराया है। अब, 65 लाख मतदाताओं की मतदान केंद्रवार सूची डाउनलोड कर उनका

फिजिकल वेरीफिकेशन करते हुए दावा-आपत्ति करना अगले 12 दिनों में असंभव जैसा है।खास बात यह है कि यह 65 लाख वोटरों की सूची वास्तव में आम मतदाताओं के किसी काम की नहीं। जिन वोटरों को BLO ने मृत / स्थायी तौर पर मतदान क्षेत्र छोड़ जाने / क्षेत्र में नहीं रहने / दो जगह में से एक जगह के वोटर लिस्ट में बताकर मतदाता सूची से हटावाया होगा, अगर वह उपलब्ध हैं तो उसी के लिए 1 अगस्त को दोपहर बाद तीन बजे से मतदाताओं के दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू कराई गई थी। यह प्रक्रिया अभी चल रही है। इस प्रक्रिया के दौरान कुछ मृत नाम जिंदा सामने आ चुके हैं, जो सामान्य पुनरीक्षण के समय भी आते रहे हैं। र दी है, बस।”






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