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अमन के रखवाले बने मुसलमान, रामनवमी पर साजिश को नहीं होने दिया कामयाब

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Muslims became the protectors of peace

असामाजिक तत्वों ने रामनवमी पर तनाव फैलाने की साजिश रची, जिसे मुसलमानों ने बेहद संवेदनशीलता के साथ लिया। साथ ही सुझबुझ, शांति और सौहार्द का परिचय देते हुए पूरी साजिश को विफल कर दिया। मामला औरंगाबाद शहर के नावाडीह मुहल्ला स्थित कब्रिस्तान से जुड़ा है। असामाजिक तत्वों के चाहने के बावजूद मामले ने कोई सांप्रदायिक रंग नहीं लिया और मुसलमानों की सुझबुझ से किसी तरह की समावेशी अनहोनी घटना टल गई। दरअसल, असामाजिक तत्वों ने शनिवार की रात कब्रिस्तान के अंदर एक इमारत के गेट की दीवार में तोड़फोड़ की, जिससे आंशिक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। साथ ही कब्रिस्तान में कई कब्रों में भी आग लगा दी, जिससे कब्रों पर पड़ी चादरें जलकर राख हो गईं। रविवार की सुबह घटना की जानकारी मिलते ही मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों की भीड़ कब्रिस्तान में जमा हो गई। सभी ने असामाजिक तत्वों की इस करतूत की निंदा की। घटना की जानकारी मिलते ही औरंगाबाद सदर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ)-1 संजय कुमार पांडेय और औरंगाबाद नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। इस तरह की करतूत को अंजाम देने की वजह जानने की कोशिश की। इसके बाद एसडीपीओ ने कब्रिस्तान परिसर स्थित एक शेड में मुसलमानों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने आश्वस्त किया कि पुलिस असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनसे सख्ती से निपटेगी। शीघ्र ही उन्हें जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया जाएगा।

बैठक में मुसलमानों ने भी धैर्य, सुझबूझ, शांति और सौहार्द का परिचय दिया। सभी ने यह माना कि यह करतूत असामाजिक तत्वों की है, जिसे किसी खास उद्देश्य से अंजाम दिया गया है। हम असामाजिक तत्वों को उनके मंसूबों में कामयाब नहीं होने देंगे। शहर में हम लोग मिलजुल कर रह रहे हैं। आगे भी रहेंगे और मिल्लत की तहजीब पर आंच नहीं आने देंगे। इधर, घटना की स्थानीय लोगों ने कड़ी निंदा की है। साथ ही असामाजिक तत्वों की पहचान कर शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। घटना की निंदा करते हुए कब्रिस्तान कमिटी के सदर सैयद गुलाम मखानी उर्फ हक्कू ने कहा कि यह घटना बेहद निंदनीय है। पुलिस जितनी जल्दी हो सके घटना को अंजाम देने वाले असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार करे और उनके नापाक मंसूबों को सभ्य समाज के सामने लाए। उनकी सभी से अपील है कि शांति-सौहार्द बनाए रखें। किसी तरह की अफवाहबाजी से दूर रहें। अफवाहों पर ध्यान न दें। सामाजिक कार्यकर्ता मुमताज अहमद जुगनू ने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर असामाजिक तत्वों की सोच पर गुस्सा भी आता है और हंसी भी आती है। कहा कि जिंदों से किसी बात को लेकर दुश्मनी हो सकती है लेकिन मुर्दों से किस बात की दुश्मनी। वे तो दुनिया से कब के जा चुके हैं।

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क्या मुर्दों ने उनका कुछ बिगाड़ा है, जो वे उनसे दुश्मनी निकाल रहे हैं और उनकी कब्रों को जला रहे हैं। कहा कि ऐसी घटना बेहद निंदा करने योग्य है। पुलिस इस कृत्य को अंजाम देने वालों को शीघ्र गिरफ्तार करे। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर कोई भी ऐसी पोस्ट नहीं डालें जिससे असामाजिक तत्वों के मंसूबे को बढ़ावा मिले और सामाजिक सौहार्द बिगड़े। सोशल मीडिया पर पुलिस की भी नजर रहती है और गलत पोस्ट डालने पर खुद भी फंस सकते हैं। गौरतलब है कि औरंगाबाद शहर में मार्च 2018 में रामनवमी के अवसर पर सांप्रदायिक दंगा हुआ था। इस दंगे में दोनों समुदाय के लोगों के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हानि पहुंची थी। लाखों की संपत्ति का नुकसान हुआ था।  पुलिस को  शहर में इंटरनेट शटडाउन तक कराना पड़ा। मामले को शांत कराने के लिए डीजीपी रैंक के पुलिस के आला अधिकारियों तक को औरंगाबाद आना पड़ा था। इस दंगें को लेकर दोनों समुदाय के दर्जनों लोग आज भी मुकदमा झेल रहे है। माना जा रहा है कि कब्रिस्तान में तोड़फोड़ और कब्रों को फूंकने के बहाने असामाजिक तत्वों ने रामनवमी पर फिर से ऐसा ही दंगा कराने की साजिश रची थी, जो विफल हो गई।





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