Home बिहार सबसे ज्यादा मतदाता पटना से बाहर, पूर्णिया ने किशनगंज को पीछे छोड़ा

सबसे ज्यादा मतदाता पटना से बाहर, पूर्णिया ने किशनगंज को पीछे छोड़ा

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Most voters are outside Patna, Purnia left Kishanganj behind

पटना: खास वर्ग के वोटरों को जानबूझ कर मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोप का जवाब आंकड़ों के रूप में चुनाव आयोग ने सामने किया है। निर्वाचन आयोग ने 25 जुलाई को जब बिहार में मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण का प्राथमिक आंकड़ा जारी किया था तो 65 लाख के करीब वोटरों का नाम हटाए जाने की बात कही थी। मृत, स्थायी तौर पर विधानसभा क्षेत्र छोड़ चुके और पुनरीक्षण प्रारूप नहीं जमा करने वालों को इस सूची में रखा गया था। अब आयोग ने जिलावार आंकड़े जारी किए तो सामने आ रहा है कि सीमांचल नहीं, बल्कि पटना से सर्वाधिक वोटर हटे हैं। दूसरे नंबर पर मधुबनी और तीसरे नंबर पर पूर्वी चंपारण है।

सीमांचल के किशनगंज से तो ज्यादा वोटर कटिहार और उससे भी ज्यादा पूर्णिया में मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद अब 2 अगस्त से कैम्प लगाकर दावा / आपत्ति लिए जाएंगे। मतलब, जिनकी मौजूदगी के बावजूद नाम हट गया है या जो मृत हैं, उनका नाम गलती से रह गया है तो उसे ठीक कराने के लिए यह समय दिया गया है। 1 सितंबर तक यह प्रक्रिया करने के बाद अंतिम तौर पर मतदाता सूची जारी होगी। आयोग ने बताया था कि 2234501 वोटर पहले ही मृत थे। 3628210 वोटर या तो स्थायी तौर पर बिहार से जा चुके हैं या पुनरीक्षण के दौरान उनकी उपलब्धता की जानकारी नहीं हासिल हुई। इसके अलावा 70136 वोटर दो या अधिक जगहों पर मतदाता सूची में दर्ज थे। इस तरह कुल 65 लाख से ज्यादा वोटरों को हटाकर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी किया गया है।

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फिलहाल मतदाता सूची का जो प्रारूप जारी किया गया है, वह बता रहा है कि मृत या कई जगहों पर निबंधित वोटर या स्थायी तौर पर विधानसभा छोड़कर जा चुके या पुनरीक्षण फॉर्म लेते-देते समय अनुपलब्ध वोटरों का नाम हटाए जाने में सबसे आगे पटना रहा है। पटना के 3.95 लाख वोटरों के नाम हटे हैं। इसी तरह मधुबनी के 3.52 लाख वोटर हटाए गए हैं। पूर्वी चंपारण के 3.16 लाख वोटरों का नाम हटाया गया है। शुक्रवार को निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आंकड़ों को देखें तो सीमांचल के किशनगंज को लेकर जिस तरह का हंगामा मचा हुआ था, वह निराधार साबित हो रहा है। राष्ट्रीय जनता दल समेत तमाम विपक्षी दलों का आरोप था कि सीमांचल, खासकर किशनगंज में अल्पसंख्यकों से मताधिकार छीनने के लिए यह विशेष गहन पुनरीक्षण कराया जा रहा है। पूर्णिया को लेकर उतना हल्ला नहीं था। अब जो आंकड़े आए हैं, वह बता रहे हैं कि पूर्णिया में 2.72 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम हटे हैं।

कटिहार में 1.84 लाख से अधिक और किशनगंज में करीब 1.45 लाख मतदाताओं का नाम हटा है। पश्चिम चम्पारण से 191376, पूर्वी चम्पारण से 316793, शिवहर से 28166, सीतामढ़ी से 244962, मधुबनी से 352545, सुपौल से 128207, अररिया से 158072, किशनगंज से 145668, पूर्णिया से 273920, कटिहार से 184254, मधेपुरा से 98076, सहरसा से 131596, दरभंगा से 203315, मुजफ्फरपुर से 282845, गोपालगंज से 310363, सीवान से 221711, सारण से 273223, वैशाली से 225953, समस्तीपुर से 283955, बेगूसराय से 167756, खगड़िया से 79551, भागलपुर से 244612, बांका से 117346, मुंगेर से 74916, लखीसराय से 48824, शेखपुरा से 26256, नालंदा से 138505, पटना से 395500, भोजपुर से 190832, बक्सर से 87645, कैमूर (भभुआ) से 73940, रोहतास से 156148, अरवल से 30180, जहानाबाद से 53089, औरंगाबाद से 159980, गया से 245663, नवादा से 126450 और जमुई से 91882 वोटर हटे हैं।


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