Home बिहार जिले को फ़ाइलेरिया मुक्त बनाना हमारी प्राथमिकता: एसीएमओ

जिले को फ़ाइलेरिया मुक्त बनाना हमारी प्राथमिकता: एसीएमओ

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Making the district filariasis free is our priority: ACMO

• 11 फरवरी को मनाया जाएगा मेगा एम.डी.ए. कैंप लगाकर कराया जाएगा दवा सेवन

• जिले में 10 फरवरी से करीब 13 लाख लाभार्थियों को फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जायेंगी

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भभुआ। 10 फरवरी, 2026 से फाइलेरिया रोग के उन्मूलन के लिए कैमूर जिले में 10 फरवरी, 2026 से शुरू किये जा रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के सफल किर्यान्वयन के लिए दिनांक 5 फ़रवरी को जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिविल सर्जन सभागार में मीडिया सहयोगियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. शांति कुमार मांझी ने कहा कि 10 फरवरी से शुरू हो रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम कार्यक्रम के दौरान सभी लाभार्थियों को फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाना सुनिश्चित किया जाएगा । उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाओं के सेवन के लिए 11 फरवरी को मेगा एम.डी.ए कैंप का आयोजन किया जाएगा जिसमे बूथ लगा कर जीविका कर्मियों एवं उनके परिवार के लोगों को दवा खिलाई जाएगी. अभियान के दौरान सभी लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा सेवन कराएंगे । इसके अतिरिक्त प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिवस तक घर-घर जाकर लाभार्थियों को दवा का सेवन कराया जाना सुनिश्चित करेंगे ।

उन्होंने कहा कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं । रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं । सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और अगर किसी को दवा खाने के बाद मितली आये , चक्कर जैसे लक्षण होते हैं तो यह शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं, जोकि दवा खाने के बाद मर रहें हैं । उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान किसी लाभार्थी को दवा सेवन के पश्चात किसी प्रकार की कोई कठिनाई प्रतीत होती है तो उससे निपटने के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रेस्पोंस टीम तैनात रहेगी ।

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, डॉ. सत्य स्वरुप ने मीडिया सहयोगियों से संवाद करते हुए बताया कि 10 फरवरी से शुरू होने वाले सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम कार्यक्रम में जिला के 9 प्रखंड में जिले के कुल 1301509 लाभार्थियों को कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डी.ई.सी. एवं अल्बेंडाज़ोल की निर्धारित खुराक, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने खिलाई जाएगी. दवाओं का वितरण बिलकुल भी नहीं किया जायेगा । ज्ञात हो कि अभियान जिला के मोहनिया, दुर्गावती तथा भभुआ शहरी क्षेत्र में अभियान नहीं चलाया जाएगा जहाँ माइक्रोफ़ाइलेरिया दर एक प्रतिशत से कम पाया गया. इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है । 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं खिलाई जाएगी। फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं । उन्होंने, मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि वे अपने समाचार पत्रों और चैनल के माध्यम से लोगों तक इस प्रकार सन्देश पहुंचाएं कि प्रत्येक लाभार्थी फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही सुनिश्चित करें और इस कार्यक्रम में उनका पूर्ण सहयोग करें ।

जिले के जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ऋषिकेश जयसवाल ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया,दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इससे बचाव न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे: हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों में सूजन) और दूधिया सफेद पेशाब (काईलूरिया) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक भेदभाव सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर व्यक्ति लगातार 5 साल तक फाइलेरिया रोधी दवा खा लेता है तो पूरे जीवन उसे फाइलेरिया रोग होने की सम्भावना समाप्त हो जाती है ।

इस अवसर पर जिला स्तरीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पदाधिकारी, मीडिया सहयोगी और अन्य सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि विश्व स्वास्थ्य संगठन, पिरामल स्वास्थ्य, लेप्रा सोसाइटी व सिफार के प्रतिनिधि के साथ सीएचओ-पीएसपी सदस्य उपस्थित थे ।

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