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बिहार में ‘जंगलराज’ का जिक्र फिर गर्माया

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Lalu Yadav's mention of 'jungle raj' again heated up in Bihar

नई दिल्ली:बिहार विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार जारी है। बिहार के चुनाव के समय एक शब्द बहुत बार सुनने को मिलता है और वो है ‘जंगलराज’, जिसे आम तौर पर राजद सरकार के 15 साल के शासन की आलोचना के लिए इस्तेमाल किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में चुनाव प्रचार के जोर पकड़ते ही फिर से इस जंगलराज शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। 

बिहार के समस्तीपुर से पीएम मोदी ने विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार की शुरुआत की और अपनी पहली ही जनसभा में जंगलराज की याद दिला दी। उन्होंने कहा कि ‘फिर एक बार एनडीए सरकार, सुशासन सरकार; जंगलराज वालों को दूर रखेगा बिहार।’ ऐसा कहा जाता है कि राजद सरकार के 15 वर्षों के कार्यकाल के दौरान बिहार में अपराध की दर बहुत ज्यादा थी और कानून व्यवस्था कमजोर थी। ऐसे में विपक्षी पार्टियां लालू सरकार के कार्यकाल की जंगलराज कहकर आलोचना करती है और अब इतने वर्षों बाद भी राजद के लिए इस शब्द से पीछा छुड़ाना संभव नहीं हो सका है। तो आइए जानते हैं कि कैसे जंगलराज शब्द का इस्तेमाल शुरू हुआ और किसने सबसे पहले इस शब्द का जिक्र किया।

विपक्षी पार्टियों द्वारा राजद सरकार के लिए जंगलराज शब्द का इस्तेमाल करने से बहुत पहले पटना हाईकोर्ट ने इस शब्द का इस्तेमाल किया था। दरअसल एक नागरिक मामले की सुनवाई के दौरान अगस्त 1997 में जस्टिस वीपी सिंह और जस्टिस धर्मपाल सिन्हा की खंडपीठ ने राजद सरकार की आलोचना करते हुए जंगलराज शब्द का इस्तेमाल किया था। दरअसल एक सामाजिक कार्यकर्ता ने पटना में बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या, नालों की सफाई न होने को लेकर अदालत में याचिका दायर की थी। उस समय अपनी टिप्पणी में नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि ‘हालात जंगलराज से भी खराब हैं और कोर्ट के निर्देशों और जनहित की भी कोई परवाह नहीं की जा रही है।’

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