Home बिहार दिग्विजय सिंह पुण्यतिथि: कभी नीतीश के करीबी, फिर बने सियासी दुश्मन; याद...

दिग्विजय सिंह पुण्यतिथि: कभी नीतीश के करीबी, फिर बने सियासी दुश्मन; याद किए गए ‘दादा’

475
0
Digvijay Singh death anniversary: ​​Once close to Nitish, then became political enemy; 'Dada' remembered

बिहार: बिहार की सियासत में ‘दादा’ कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह, एक ऐसा प्रभावशाली नाम था, जिनकी शख्सियत लोगों के मन मस्तिष्क में आज भी घूमती है। ऐसा हम नहीं बल्कि ऐसा वो कह रहे हैं जो उनको व्यक्तित्व रूप से जानते हैं। जदयू के प्रदेश समिति सहायक सलाहकार इंजीनियर शंभू शरण ने बताया कि गिद्धौर के नयागांव में जन्म लेने वाले दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हुए भारतीय राजनीति पर विशेष पकड़ स्थापित की थी। इलाके के लोग प्रेमवश ‘दादा’ कहकर बुलाते रहे और अब भी उनकी चर्चाएं इसी नाम से होती है। उन्होंने कहा कि दादा के पुण्यतिथि को राजकीय समारोह घोषित किया जाए। जदयू के खैरा प्रखंड अध्यक्ष रामानंद सिंह ने बताया कि चंदेल राजवंश घराने के कुमार सुरेन्द्र सिंह व सोना देवी के पुत्र पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. दिग्विजय सिंह अपने जीवन काल मे लोकहित में किये कार्य और समाज के प्रति उनका निःस्वार्थ समर्पण के कारण आज भी अपने चाहने वालों के दिल में जिन्दा हैं।

उत्कृष्ट व्यक्तित्व के धनी रहे दिग्विजय सिंह अपने परिपक्व राजनीतिक जीवन में जब तक रहे ‘दिग्विजय’ रहे। शायद यही कारण है कि विपरीत परिस्थियों में भी अपने सिद्धातों पर अडिग रहने वाले दिग्विजय सिंह के दिवंगतोपरांत आज भी लोग उनके विचारों, आदर्शों एवं प्रतिभाओं की आभा को आत्मसात करने को लालायित रहते हैं। भाजपा के जिला अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद केसरी ने कहा कि दिग्विजय सिंह अपने कार्यों के बदौलत आज भी लोगों के दिल में बसते हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी अपनी छाप छोड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का ताल्लुक भले ही राजपरिवार से रहा हो, लेकिन उनका मिजाज समाजवादी था। शायद यही कारण था कि जॉर्ज फर्नांडीस और नीतीश कुमार से पहले इनकी खूब छनी। सन् 1989 में बांका से अपना राजनीतिक जीवनारंभ करने के बाद कभी चरित्र व व्यक्तित्व से समझौता नहीं किया।

GNSU Admission Open 2026

वे सदैव स्वाभिमान की लड़ाई लड़ते रहे। वे जनता की बेबसी, अनीति, लाचारी, बेरोजगारी व अन्याय के विरुद्ध सदैव संघर्ष कर उनके हक और अधिकार के लिए प्रयासरत रहे। उनके राजनीतिक जीवन मे कई दाव पेंच आए, लेकिन इनका स्वभाव स्थिर रहा। जदयू के जिला महासचिव राजेश कुमार ने बताया कि निशानेबाजी के शौकीन रहे दिग्विजय सिंह ने राजनीति में भी कई सटीक निशाने लगाए। इनका निशाना कुछ इतना सटीक होता था कि इनके प्रतिद्वंदी तिलमिला उठते थे। वर्ष 2009 में नीतीश और दिग्विजय सिंह की कटुता खुलकर सामने आ गई थी। भाजपा जिला महामंत्री बृजनंदन सिंह ने कहा कि दिग्विजय सिंह ऐसे व्यक्ति थे जो सभी के दिल में बसते थे। दिग्विजय सिंह बांका से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। उस वक्त इस सीट पर नीतीश कुमार ने अपने कैंडिडेट को उतारा था, लेकिन दिग्विजय सिंह ने अपनी ताकत दिखाई और निर्दलीय ही चुनाव जीतकर बांका को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

हालांकि इसके कुछ ही दिन बाद 24 जून 2010 में लंदन में दिग्विजय सिंह का ब्रेन हेमरेज की वजह से उनके निधन के साथ ही बिहार की राजनीति का एक अध्याय समाप्त हो गया। जिसके बाद उनकी पत्नी पुतुल कुमारी राजनीतिक में अपनी कदम रखी और  वह अपने पति की मृत्यु के बाद 2010 में उपचुनाव में बांका से लोकसभा के लिए चुनी गईं, जो 2009 के आम चुनाव में बांका से जीते थे। जबकि 2019 में बांका से दो बार लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं। बृजनंदन सिंह ने कहा कि श्रेयसी सिंह बिहार के दिग्गज नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी है जो की 2020 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुई थी। श्रेयसी ने भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद श्रेयसी ने जेपी नड्डा से भी मुलाकात की। श्रेयसी सिंह ने भाजपा जॉइन करने के बाद भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें टिकट देकर अपना उमीदवार भी बनाया। जिसके बाद भाजपा कैंडिडेट के रूप में श्रेयसी सिंह ने अपने डेब्यू सियासी पारी में शानदार जीत हासिल की है। 

GNSU Admission Open 2026