पटना। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा-माले) के राज्य सचिव कुणाल ने बागमती नदी पर तटबंध निर्माण पर रोक लगाने की मांग करते हुए रविवार को कहा कि बाढ़ नियंत्रण के नाम पर इसका निर्माण बिहार के लिए विनाशकारी साबित होगा।श्री कुणाल ने मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड स्थित बेनीबाद में 16 फरवरी से जारी सामूहिक अनशन के दौरान मिडिया में बयान जारी कर कहा है कि जब तक राज्य सरकार की तरफ से गठित रिव्यू कमिटी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करती, तब तक तटबंध निर्माण के सभी कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाये । भाकपा-माले नेता ने कहा कि तटबंध निर्माण की मौजूदा योजना के तहत सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और समस्तीपुर के करीब 120 गांव बांध के भीतर आ जाएंगे, इससे सैकड़ों परिवारों का विस्थापन होगा और हजारों एकड़ उपजाऊ खेती की जमीन बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल पर्यावरण और आजीविका का प्रश्न नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और मानवाधिकार का भी मुद्दा है। श्री कुणाल ने याद दिलाया कि जनआंदोलनों और नदी विशेषज्ञों के दबाव में वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने एक रिव्यू कमिटी गठित की थी और घोषणा की थी कि कमिटी की रिपोर्ट आने तक तटबंध निर्माण का काम नहीं होगा, लेकिन आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद कमिटी को न तो पर्याप्त संसाधन दिए गए और न ही उसे प्रभावी ढंग से काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि तय बातों को मानने के बजाय बीच-बीच में प्रशासनिक बल के सहारे निर्माण कार्य शुरू कराया जाता है और आंदोलनकारियों पर फर्जी मुकदमे लादे जाते हैं।







