पटना: विधानसभा में मानसून सत्र के तीसरे दिन भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा। लंच के बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई लेकिन इंडिया गठबंधन के विधायक फिर से हंगामा करने लगे। वह सरकार से मतदाता पुनरीक्षण कार्य पर चर्चा कराने की मांग कर रहे थे। लेकिन, विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के विधायकों को अपने स्थान पर बैठने के लिए कहा। लेकिन, विपक्ष ने उनकी बात नहीं मानी और वॉकआउट कर सदन के बाहर निकल गए। इसके बाद इंडिया गठबंधन के विधायकों ने प्रेस वार्ता की। विपक्ष ने कहा कि बिहार वोटरों के नाम काटने की साजिश चल रही है। करीब 57 लाख लोगो के नाम मतदाता सूची से कटने वाला है।
हमलोग इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा करवाना चाह रहे हैं लेकिन सरकार इससे भाग रही है। विपक्ष के विधायक संदीप आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी वोट का अपहरण करना चाहती है। लेकिन, हमलोग ऐसा होने नहीं देंगे। हमलोग गरीबों और वंचितों के साथ अंतिम सांस तक खड़े रहेंगे। कांग्रेस के विधायक शकील अहमद खान ने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जो हरकत की, उसे हमलोगों ने नोटिस किया। उन्हें नेता प्रतिपक्ष पर बोलने की कोई जरूरत नहीं थी लेकिन उन्होंने अनर्गल टिप्पणी की। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने खुद संज्ञान लिया। यह बहुत हास्यास्पद विषय है। ऐसा लग रहा था कि सरकार खुद ही सदन चलाने के पक्ष में नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने बहुत ही तार्किक बात की थी। उन्होंने SIR के ऊपर बुनियादी सवाल उठाए। वह तर्कसंगत बात कर रहे थे लेकिन सरकार को उनकी बात पसंद नहीं आई और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा अनावश्यक टिप्पणी करने लगे। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष जनता की आवाज होती है। लेकिन सदन में विपक्ष को बोलते नहीं दिया जा रहा है।
इसलिए विपक्ष के पास बॉयकॉट करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि पिछले दो-तीन सप्ताह से हम लोग सड़क पर मतदाता पुनरीक्षण कार्य के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। हम लोग सरकार से इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। हम लोग जनता की जो समस्या है उसे सरकार के समक्ष रख रहे हैं लेकिन इस पर कोई फायदा नहीं हो रहा है। इंडिया गठबंधन में जनता के मुद्दे को उठाया। सदन में इसकी चर्चा की मांग की लेकिन सरकार की तरफ से इस पर संज्ञान नहीं लिया गया। अब तो चुनाव आयोग ने भी घोषणा कर दी है कि 51 लाख लोगों का नाम मतदाता सूची से काटा जा रहा है। ऐसा करना गलत है। ऐसा प्रतीत होता है कि अब मतदाता सरकार को नहीं चुन रहे हैं बल्कि सरकार ही मतदाताओं को चुन रही है।







