
बिहार: परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ की ओर से शनिवार को जिला समाहरणालय परिसर स्थित धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। इसमें जिले भर से सैकड़ों की संख्या में शिक्षक जुटे और अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धरना स्थल पर शिक्षकों के साथ विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) वंशीधर बृजवासी भी शामिल हुए और सरकार पर जमकर हमला बोला। धरना दे रहे शिक्षकों ने बताया कि 19 जून 2025 को स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद विद्यालय आवंटन की गई, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नियोजित शिक्षकों को दो दशक बीत जाने के बाद भी प्रोन्नति का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
इससे शिक्षक समुदाय में गहरा आक्रोश है। उन्होंने मांग की कि विशिष्ट शिक्षक, विद्यालय शिक्षक, प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षक के पदों पर नियुक्त शिक्षकों को सेवा की निरंतरता और पूर्ण वेतन संरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। धरना स्थल पर मौजूद एमएलसी वंशीधर बृजवासी ने कहा कि मैं शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के समर्थन से इस सीट तक पहुंचा हूं। पूरे राज्य में शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर हैं, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है। बिहार में शिक्षकों की हालत मजदूरों जैसी कर दी गई है। प्रमोशन नहीं दिया जा रहा, निलंबन की तलवार लटक रही है, और स्थानांतरण में भारी गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानांतरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई। जो शिक्षक घर के पास तबादला चाहते थे, उन्हें 150 किलोमीटर दूर भेज दिया गया। यह कौन-सा सुशासन है? शिक्षक दवा मांग रहे थे, लेकिन उन्हें दर्द दे दिया गया।
एमएलसी ने यह भी कहा कि बिहार के युवाओं को डोमिसाइल नीति की सख्त जरूरत है और TRE 4 (शिक्षक बहाली परीक्षा) में डोमिसाइल लागू होना चाहिए। उन्होंने एनसीईआरटी की किताबें केवल कक्षा 6 से 8 तक लागू करने पर भी सवाल उठाया और मांग की कि राज्य में पहली से 12वीं तक सभी कक्षाओं में एनसीईआरटी की किताबें लागू की जाएं। एमएलसी बृजवासी ने राज्य भर के विद्यालयों में बेंच-डेस्क, सबमर्सिबल पंप आदि की खरीद में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। धरना प्रदर्शन के बाद शिक्षकों और प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।






