बिहार: दरभंगा व्यवहार न्यायालय में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब कोर्ट ने एक नामी क्रिमिनल लॉयर अम्बर इमाम हाशमी को अदालत से ही गिरफ्तार कर जेल भेजने का आदेश दे दिया। यह मामला 32 साल पुराने एक हत्या से जुड़ा है, जिसमें हाशमी समेत उनके दो भाइयों पर गंभीर आरोप हैं। दरअसल, वकील अम्बर इमाम हाशमी ने आज कोर्ट में उपस्थित होने से बचने के लिए फॉर्म 117 भरकर बताया था कि वे जिले से बाहर हैं। लेकिन कुछ ही देर बाद वे उसी एडीजे तृतीय (सुमन कुमार दिवाकर) की अदालत में एक अन्य केस की बहस करने पहुँच गए। जज ने जब उन्हें देखा तो पूछा कि आप तो अवकाश पर थे, फिर यहां कैसे? इसके बाद कोर्ट ने उन्हें तत्काल न्यायिक हिरासत में लेकर गिरफ्तार करने का आदेश दिया।
अम्बर इमाम हाशमी की गिरफ्तारी से दरभंगा कोर्ट में वकीलों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और कहा कि जब तक हाशमी को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, वे सभी न्यायिक कार्यों से खुद को अलग रखेंगे। वकीलों ने कहा कि आज का दिन दरभंगा न्यायालय के इतिहास में ‘काला दिन’ के रूप में देखा जाएगा। यह केस वर्ष 1994 का है, जब हनुमाननगर थाना क्षेत्र के पटोरी बसंत गांव में दर्जनों राउंड फायरिंग हुई थी।
इस घटना में रामकृपाल चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई थी और छह लोग घायल हो गए थे। इसके बाद विशनपुर थाने में मामला संख्या 58/1994 दर्ज किया गया था। अम्बर इमाम हाशमी के साथ उनके सहयोगी वकील सुशील कुमार चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया है। सुशील चौधरी ने बताया कि उन्हें भी इसी केस के तहत न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजा गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ठाकुर ने इस कार्रवाई को गलत ठहराते हुए कहा कि किसी भी अधिवक्ता को ऐसे मामले में जमानत का अधिकार होता है। कोर्ट ने बिना कारण उन्हें जेल भेजकर मनमानी की है।







