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बिहार के इस गांव में लगाया ‘नेताओं का प्रवेश बंद’ का बोर्ड, जानिए क्या है वजह

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A board saying 'Entry of leaders prohibited' was put up in this village of Bihar, know the reason

बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए वादे पूरे न होने से नाराज मुजफ्फरपुर के ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों ने अब नेताओं के अपने गांव में आने पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है। यह विरोध मुजफ्फरपुर जिले के कांटी विधानसभा क्षेत्र में नरसंडा से पकड़ी तक की जर्जर सड़क को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क पिछले 20 वर्षों से खस्ताहाल है।

इस दौरान कई चुनाव आए और गए, लेकिन सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है। करीब 10,000 की आबादी वाले इस क्षेत्र में लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी होती है। बारिश के दिनों में तो कीचड़ और गड्ढों के कारण जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती है। इस समस्या से त्रस्त होकर स्थानीय ग्रामीणों ने एनएच (राष्ट्रीय राजमार्ग) से लेकर कई अन्य जगहों पर “रोड नहीं तो वोट नहीं” के बैनर और पोस्टर लगा दिए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि जब तक सड़क का निर्माण नहीं होगा, तब तक वे न तो वोट देंगे और न ही किसी नेता को अपने गांव में आने देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क एनएच 28 के नरसंडा से सीधे पकड़ी गांव की ओर आती है।

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लगभग तीन से चार किलोमीटर की इस सड़क पर दस हजार से अधिक लोग रहते हैं। पिछले दो दशकों से यहां की सड़कों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। हर चुनाव में नेता आते हैं, जनता से वोट मांगकर ठगते हैं और फिर चले जाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब वे पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक इसराइल मंसूरी के पास जाते हैं, तो वे कहते हैं कि यह उनके बस में नहीं है और उनका काम नहीं है। ऐसे में जनता आखिर जाए तो जाए कहां? ग्रामीणों ने अब यह दृढ़ निर्णय लिया है कि इस चुनाव में सड़क बने बिना वे किसी भी नेता को वोट नहीं देंगे। उनका कहना है कि नेता केवल वोट के नाम पर आम आदमी को ठगते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को दूर करने का काम नहीं करते।





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