Home बिहार बिहार के छात्र ने बनाया देसी Alexa, वॉयस कमांड से पंखा-लाइट होगा...

बिहार के छात्र ने बनाया देसी Alexa, वॉयस कमांड से पंखा-लाइट होगा कंट्रोल

194
0
Bihar student creates desi Alexa, controls fans and lights with voice commands

नालंदा: आवश्यकता ही नहीं, कभी-कभी आलस भी आविष्कार की जननी बन जाता है। इसे सिद्ध कर दिखाया है बिहारशरीफ के होनहार छात्र अनिल आलोक ने। अब घर की बत्ती बुझाने, पंखा या अन्य उपकरण बंद करने के लिए स्विच बोर्ड तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बस ‘रोबो’ को आवाज दीजिए और आपकी बात मानकर मशीन काम करने लगेगी। उन्होंने इस अनोखा स्मार्ट होम ऑटोमेशन उपकरण को ‘रोबो घर का दिमाग’ नाम दिया है। बिहार के छात्र का ‘देसी Alexa’ देखने के लिए उसके घर भी लोग आने लगे हैं। अनिल शहर के महलपर निवासी शैलेंद्र प्रसाद और आशा सिन्हा का पुत्र है। वे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) रांची के कंप्यूटर विज्ञान के छात्र है । इस नवाचार के लिए अनिल को भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से आयोजित ‘यूथ इनोवेशन चैलेंज डिजाइन फॉर भारत (झारखंड चैप्टर)’ में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस अविष्कार के पीछे की कहानी भी बेहद रोचक है। अनिल बताते हैं कि हॉस्टल में रहते समय उन्हें रोजमर्रा की एक छोटी-सी समस्या परेशान करती थी।

सर्दियों में रजाई में घुसने के बाद लाइट या पंखा बंद करने के लिए उठना उन्हें सबसे कठिन काम लगता था। वे कहते हैं, ‘मेरा यही आलस मेरी रचनात्मकता की वजह बन गया।’ कंप्यूटर विज्ञान के छात्र होने के नाते उन्होंने सोचा कि क्यों न तकनीक और कोडिंग की मदद से इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। यहीं से ‘रोबा’ की नींव पड़ी। अनिल ने अपने उपकरण का नाम ‘रोबो’ रखा है। यह डिवाइस घर के पुराने स्विच बोर्ड के अंदर या उसके पास आसानी से लगाया जा सकता है। यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (वस्तुओं का इंटरनेट) की तर्ज पर काम करता है। जैसे ही आप कहेंगे ‘हे रोबो, पंखा बंद कर दो’ डिवाइस में लगा माइक्रोफोन आपकी आवाज को पहचानता है। इसके बाद सूक्ष्म नियंत्रक (माइक्रोकंट्रोलर) के जरिए रिले को संकेत भेजा जाता है और पंखा तुरंत बंद हो जाता है।

GNSU Admission Open 2026

इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसकी कनेक्टिविटी है। इसमें वाई-फाई और ब्लूटूथ दोनों की सुविधा मौजूद है। उन्होंने बताया कि यह उपकरण बिजली खपत की निगरानी भी करता है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी रोकी जा सकती है। हालांकि इस सफलता तक पहुंचना आसान नहीं था। इस प्रोटोटाइप को तैयार करने में उन्हें एक महीने से अधिक समय लगा। कभी कोडिंग में त्रुटि आई, तो कभी गलत वायरिंग से उपकरण जल गए। कई बार प्रणाली पूरी तरह विफल हो गई और शॉर्ट सर्किट से नुकसान भी हुआ, लेकिन अनिल ने हार नहीं मानी। करीब पांच से छह हजार रुपये के खर्च और कई सुधारों के बाद अब यह डिवाइस पूरी तरह स्थिर अवस्था में काम कर रहा है। तकनीकी रूप से इसमें पांच वोल्ट पर चलने वाले सूक्ष्म नियंत्रकों का उपयोग किया गया है, जो रिले की मदद से घर के 220 वोल्ट वाले उपकरणों को नियंत्रित करते हैं। अनिल का लक्ष्य अपना खुद का स्टार्टअप शुरू कर लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।

GNSU Admission Open 2026