
पटना: बिहार की राजनीति में एक ओर नए सीएम को लेकर हलचल है तो दूसरी ओर गांव की सरकार के लिए पंचायतों में जोड़-घटाव चल रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग जहां नवंबर-दिसंबर 2026 में चुनाव कराने की तैयारी में जुटा है, वहीं पटना हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका ने पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि राज्य में पंचायत चुनाव अभी भी 1991 के परिसीमन और नक्शों के आधार पर हो रहे हैं। तीन दशकों में बिहार की जनसंख्या और भूगोल में आए व्यापक बदलावों के बावजूद पुराने ढांचे पर चुनाव कराना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया जा रहा है। इस कानूनी-पेच ने सरकार और आयोग की रातों की नींद उड़ा दी है।
बिहार पंचायत में वर्तमान पंचायत सीमाएं 1991 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित हैं। याचिकाकर्ताओं, जिनमें मुखिया संघ के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, उन्होंने सवाल उठाया है।
- 1991 में तय किया गया ढांचा आज की आबादी के अनुपात में पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुका है।
- जनसंख्या बढ़ने से कई पंचायतों में वार्डों का संतुलन बिगड़ गया है, जिससे सही प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।
- मांग की गई है कि जब तक नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) नहीं होता, तब तक चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
पिछले कुछ वर्षों में बिहार में तेजी से हुए शहरी विस्तार ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। राज्य में 261 नए शहरी निकायों (नगर निगम/परिषद/पंचायत) का गठन हुआ है। शहरी विस्तार के कारण कई ग्राम पंचायतों का कुछ हिस्सा शहर में चला गया, लेकिन शेष ग्रामीण हिस्से का पुनर्निर्धारण नहीं हुआ। भौगोलिक बदलावों के कारण मौजूदा आरक्षण प्रणाली और वार्डों की संरचना भी प्रभावित हुई है। बिहार पंचायत चुनाव 2026 कब होगा? इस बार दिखेगा बड़ा फेरबदल, मुखिया-सरपंच उम्मीदवार ध्यान दें
बिहार में पंचायत परिसीमन को लेकर चल रहे विवादों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। सभी पदाधिकारियों को इसे लेकर चिट्ठी भेजी जा चुकी है।
- सभी जिलों के जिला अधिकारियों (DM) को ‘जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत)’ नामित किया गया है।
- जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को उप जिला निर्वाचन पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- आयोग ने मुख्य सचिव और पंचायती राज विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को तैयारी पूरी करने के निर्देश भेज दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल चुनाव की तारीखों को लेकर है। अगर पटना हाई कोर्ट नए परिसीमन का आदेश देता है, तो देरी की संभावना है। परिसीमन एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें महीनों का समय लग सकता है। इससे नवंबर-दिसंबर 2026 का संभावित टारगेट प्रभावित हो सकता है। नया नक्शा तैयार होने से कई मौजूदा जनप्रतिनिधियों की सीटें बदल सकती हैं, जिससे स्थानीय सत्ता समीकरण पूरी तरह पलट सकते हैं। फिलहाल आयोग पुरानी व्यवस्था के तहत ही तैयारी कर रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई पर टिका है।






