पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने की अटकलें तेज हो गई हैं। कांग्रेस के सभी छह विधायकों के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के संपर्क में होने की चर्चा ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। पटना में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘दही-चूड़ा’ कार्यक्रम में सभी छह विधायकों की अनुपस्थिति के बाद से इन कयासों को और बल मिला। मनिहारी के मनोहर प्रसाद सिंह, वाल्मीकि नगर के सुरेंद्र प्रसाद, चनपटिया के अभिषेक रंजन, अररिया के आबिदुर रहमान, किशनगंज के मोहम्मद कमरुल होदा और फारबिसगंज के मनोज बिस्वान कार्यक्रम से नदारद रहे।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि ये सभी विधायक जदयू में शामिल हो जाते हैं तो बिहार विधानसभा में कांग्रेस का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा और राजद के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन कमजोर पड़ जाएगा। इससे पहले पीसीसी अध्यक्ष राजेश राम द्वारा रोजगार सुरक्षा को लेकर बुलाई गई बैठक में भी दो विधायक नहीं पहुंचे थे, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की बात सामने आई थी।
हालांकि बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि एनडीए नेता जानबूझकर अफवाह फैला रहे हैं और कांग्रेस एकजुट है। वहीं नीतीश सरकार में एलजेपी कोटे के मंत्री संजय सिंह ने दावा किया कि मकर संक्रांति के बाद कांग्रेस में बड़ी टूट देखने को मिलेगी और सभी विधायक एनडीए में शामिल हो सकते हैं।
इसी बीच बिहार विधानमंडल का बजट सत्र 2 फरवरी से 27 फरवरी तक बुलाया गया है, जिसमें कुल 19 बैठकें होंगी। 3 फरवरी को नीतीश सरकार 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करेगी, जबकि 9 फरवरी को 2025-26 का तीसरा अनुपूरक बजट रखा जाएगा। सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान दोनों सदनों को संबोधित करेंगे और आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। ऐसे में संभावित दलबदल ने सत्र से पहले बिहार की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है।







