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बिहार: अस्पताल में बिना योग्यता के प्रसव करवा रही BAMS डॉक्टर, भांजे ने ऑपरेशन थिएटर का वीडियो किया वायरल

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Bihar: BAMS doctor conducting deliveries in hospital without qualification, nephew made operation theatre video viral

बिहार: सीवान शहर के चकिया रोड स्थित एक निजी अस्पताल का हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें बीएएमएस डिग्रीधारी डॉक्टर कंचन कुमारी वह प्रसव ऑपरेशन करती दिख रही हैं। वीडियो अस्पताल परिसर के ऑपरेशन थिएटर के अंदर रिकॉर्ड किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शूट करने वाला व्यक्ति खुद डॉक्टर का भांजा है, जो ऑपरेशन के बीच–बीच में कैमरा घुमाते हुए कहता सुनाई पड़ता है कि जब भी मेरी मामी ऑपरेशन करती हैं, बेटा ही होता है। वायरल वीडियो में डॉक्टर के हाथों में दस्ताने नहीं हैं, चेहरे पर मास्क नहीं है और न ही कोई एनेस्थेटिस्ट दिखाई दे रहा है।

स्वास्थ्य मानकों की यह अनदेखी मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। वीडियो के वायरल होने के बाद सीवान सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अनूप दुबे ने स्पष्ट कहा कि बीएएमएस डिग्रीधारी चिकित्सकों को सर्जिकल डिलीवरी कराने की कानूनी अनुमति नहीं है। उन्होंने इसे चिकित्सा नियमों का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि ऐसा कृत्य पहले भी कई बार सामने आया है। इससे प्रसूता तथा नवजात दोनों की जान जोखिम में पड़ सकती है। डॉ. दुबे का कहना है कि इस तरह का ऑपरेशन केवल पंजीकृत सर्जन ही कर सकता है। पूर्व सदर अस्पताल मैनेजर एसरारुल हक ने भी पुष्टि की कि किसी गैर सर्जन द्वारा ऑपरेशन थिएटर में शल्यक्रिया करना घोर लापरवाही है। उनका मानना है कि इस मामले में फौरी जांच और शीघ्र कार्रवाई जरूरी है ताकि अन्य निजी संस्थान स्वास्थ्य नियमों की धज्जियां उड़ा कर मरीजों की जान को खतरे में न डालें।

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मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर सिविल सर्जन श्री निवास प्रसाद ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है, पहले ऑफिस में आकर मिलिए। उनके इस टालू रवैये ने स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है। चिकित्सक संघ और सामाजिक कार्यकर्ता अब जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग से संज्ञान लेकर सघन जांच शुरू कराने की मांग कर रहे हैं। इलाके के स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि अगर किसी भी प्रसूता या नवजात को नुकसान पहुंचा है, तो भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, बिहार क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट और उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल वीडियो वायरल होने के बाद जन दबाव बढ़ गया है, पर अंतिम कार्रवाई सिविल सर्जन और जिला प्रशासन पर निर्भर करेगी।




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