
पटना: वर्ष 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों की प्रतिनिधित्व की संख्या को 11 तक सिमट जाने को ध्यान में रखे तो यह साफ दिखता है कि मुस्लिमों में सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन अभी भी विद्यमान है। आबादी 17.6 प्रतिशत और विधानसभा में प्रतिनिधित्व 4.52 प्रतिशत। ऐसे में लोकतंत्र के प्लेटफार्म पर मुस्लिम हक हकूक का रिफ्लेक्शन कैसे होगा? यह एक बड़ा सवाल है, जिसे आने वाले चुनाव से पहले सुलझाना होगा। वह भी इस बात का ध्यान रखते कि दलित के उत्थान के लिए आरक्षण का दरकार अभी तक बना हुआ है, पर भारत के लोकतांत्रिक प्रणाली में धर्म के आधार पर मुस्लिमों के लिए आरक्षण का प्रावधान असंभव है। ऐसे में मुस्लिमों के पास एक मात्र विकल्प है कि आपकी गोलबंदी समस्याओं के साथ विकास के धरातल पर होना चाहिए। जानकारों की राय में अलगाववादी की दृष्टिकोण के साथ संभव नहीं है। जिस तरह से हिंदू की जातीय आपसी संघर्ष के साथ सत्ता की भागीदारी में विकास का रास्ता ढूंढते हैं।
बिहार की सत्ता की ही बात कर लें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कितनी बड़ी जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं? कई जातियों से उनकी संख्या कम है। लेकिन नीतीश कुमार की गोलबंदी समस्या के सवाल पर है। बेहतर शिक्षा के सवाल पर। सुशासन के सवाल पर। विकास के सवाल पर। यही वजह भी है कि मुस्लिमों को एक हद तक नीतीश कुमार ने जोड़ना चाहा। कुछ समर्थन मिला भी। चुनावी जंग 2025में राष्ट्रीय जनता दल ने कुल 17 उम्मीदवारों को जंग में उतारा। इनमें से जीत कर तीन उम्मीदवार ही जीत कर विधानसभा के दरवाजे दस्तक देंगे। इनमें ढाका से राजद के उम्मीदवार फैसल रहमान, बिस्फी से आसिफ अहमद और रघुनाथपुर से ओसामा शहाब ही विधानसभा में दिखेंगे। वर्ष 2025 विधानसभा की जंग जीत कर कुल 11 में से पांच विधायक केवल एआईएमआईएम के सदन में दिखेंगे।
इनमें बहादुरगंज से तौसीफ आलम, जोकीहाट से मुर्शिद आलम, कोचाधामन से सरवर आलम, बायसी से गुलाम सरवर और अमौर से अख्तरुल इस्लाम सदन में दिखेंगे। विधानसभा चुनाव 2025 की जंग में राष्ट्रीय कांग्रेस ने कुल 10 उम्मीदवार बेतिया, अररिया, बहादुरगंज, किशनगंज,अमौर , कसवा, कदवां, बिहारशरीफ,सुपौल और बरारी से उतारे थे पर उन्हें जीत सिर्फ दो के हाथ लगी। बिहार विधानसभा में कांग्रेस के जो दो विधायक दिखेंगे वे किशनगंज से कमरुल होदा और अररिया से आबिदुर रहमान। इस चुनाव में जेडीयू ने कुल चार विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे। इनमें अररिया से शगुफ्ता अजीम ,जोकीहाट से मंजर आलम ,अमौर से सबा जफर और चैनपुर से जमा खान। इनमें से सिर्फ जमा खा ही जीत कर आए और वे विधानसभा में दिखेंगे।






