
बिहार: बिहार सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ एक बार फिर अपनी सादगी और जमीन से जुड़ाव के कारण सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे राजगीर की एक सामान्य चाय दुकान पर न केवल कुल्हड़ में चाय पीते नजर आ रहे हैं, बल्कि खुद अपने हाथों से मिठाई लौंग लता भी बनाते दिख रहे हैं। बुधवार शाम की यह घटना है, जब डॉ. सिद्धार्थ राजगीर में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद लौट रहे थे। इसी दौरान चाय पीने की इच्छा से वे एक स्थानीय दुकान पर रुक गए। दुकानदार ने उन्हें सामान्य ग्राहक समझते हुए मिट्टी के कुल्हड़ में चाय दी, जिसे उन्होंने सहजता से स्वीकार कर लिया और बैठकर चाय पीने लगे। चाय पीते समय डॉ. सिद्धार्थ की नजर दुकान में बन रही लौंग लता पर पड़ी, जो बिहार, यूपी और बंगाल की पारंपरिक मिठाइयों में शुमार है।
उन्होंने दुकानदार से मिठाई के बारे में जानकारी ली और फिर स्वयं उसमें रुचि लेते हुए अपने हाथों से लौंग लता बनानी शुरू कर दी। इतना ही नहीं, वे उसे तेल में तलने यानी कड़ाही में छानने तक लगे रहे। इस दौरान कुछ स्थानीय लोग वहां पहुंचे और उन्हें पहचानते हुए “प्रणाम सर” कहा। इसके बाद दुकानदार और अन्य लोगों को पता चला कि वे कोई आम ग्राहक नहीं, बल्कि बिहार सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। यह जानकर लोग हैरान रह गए कि इतने उच्च पद पर बैठा अधिकारी इतनी सादगी से आम जनजीवन में घुलमिल रहा है। चाय पीते समय डॉ. सिद्धार्थ की नजर दुकान में बन रही लौंग लता पर पड़ी, जो बिहार, यूपी और बंगाल की पारंपरिक मिठाइयों में शुमार है। उन्होंने दुकानदार से मिठाई के बारे में जानकारी ली और फिर स्वयं उसमें रुचि लेते हुए अपने हाथों से लौंग लता बनानी शुरू कर दी। इतना ही नहीं, वे उसे तेल में तलने यानी कड़ाही में छानने तक लगे रहे। इस दौरान कुछ स्थानीय लोग वहां पहुंचे और उन्हें पहचानते हुए “प्रणाम सर” कहा। इसके बाद दुकानदार और अन्य लोगों को पता चला कि वे कोई आम ग्राहक नहीं, बल्कि बिहार सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। यह जानकर लोग हैरान रह गए कि इतने उच्च पद पर बैठा अधिकारी इतनी सादगी से आम जनजीवन में घुलमिल रहा है। 1991 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. एस. सिद्धार्थ वर्तमान में कैबिनेट और शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं।
वे अपने सरल स्वभाव, व्यावहारिक दृष्टिकोण और जनसंपर्क क्षमता के लिए चर्चित हैं। लेकिन उनका व्यक्तित्व प्रशासनिक दायरे तक सीमित नहीं है। वे प्रशिक्षित पायलट, पेशेवर वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, चित्रकार और कार्टूनिस्ट भी हैं।डॉ. सिद्धार्थ अक्सर झोला लेकर सब्जी खरीदते, लोकल हेयर कट सैलून में हजामत बनवाते या मोटरसाइकिल से अकेले सफर करते देखे जाते हैं। वे अचानक स्कूलों का निरीक्षण करने पहुंच जाते हैं और बच्चों से सीधे संवाद करते हैं। 17 अप्रैल को उन्होंने CESSNA 172 विमान की सोलो फ्लाइट पूरी की थी, जो उनकी सीखने की जिजीविषा को दर्शाता है। डॉ. एस. सिद्धार्थ की यह घटना न सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित है, बल्कि यह इस बात की मिसाल है कि ऊंचे पद पर बैठा व्यक्ति यदि जमीन से जुड़ा रह सकता है, तो वह जनता के दिलों में अपनी जगह भी बना सकता है। वे अधिकारियों की उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मानती है कि विनम्रता, सादगी और संवेदनशीलता ही एक सच्चे लोकसेवक की पहचान है।






