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भारत रत्न या संन्यास? नीतीश के नाम पर उठी मांग के पीछे सियासी गणित

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Bharat Ratna or retirement? The political arithmetic behind the demand for Nitish Kumar's name

पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भारत रत्न देने की मांग कोई नया नहीं है। समाजवादी राजनीति के प्रणेता बन अभी तक राजनीति से विकास का जो रास्ता तय किया है उन कार्यों के लिए भारत रत्न सम्मान के वो हकदार हैं,इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस सक्रिय राजनीति के साथ जगह-जगह धमक रहे हैं, उस खास खड़ी में भारत रत्न की मांग उनकी सक्रिय राजनीति को खत्म करने की गुहार या फिर अपना कुछ खास मकसद ज्यादा दिखता है। ऐसा नहीं कि यह मांग कोई पहली बार उठी हो इसके पहले भी कई बार भारत रत्न की मांग उठी है। यहां तक कि भाजपा नेता ने भी नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी। जनवरी 2026 में जदयू नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर भारत रत्न देने की मांग की है। तर्क यह दिया कि नीतीश कुमार को समाजवादी आंदोलन के अनमोल रत्न हैं।

उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सामाजिक न्याय, सुशासन, महिला सशक्तीकरण और विकास को नई दिशा दी है। राष्ट्रीय राजनीति में भी एक अलग पहचान बनाई है। पहले भी देश में कई जीवित नेताओं को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है, इसलिए इस आधार पर नीतीश कुमार को नजर अंदाज करना उचित नहीं होगा। राजनीति में इंतजार का फल मीठा होता है। केसी त्यागी भी जदयू के उन इंतजार कर रहे नेताओं में शामिल हैं जिन्हें नीतीश कुमार का देखने का इंतजार है। राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह चल रही है कि जब से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि हरिवंश नारायण रिपीट नहीं होंगे। इसकी वजह इनका भाजपा कनेक्शन बताया जा रहा है। इस खबर के बाद राज्यसभा जाने को इच्छुक नेताओं की दौड़ राजधानी होने लगी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि केसी त्यागी भी इस रेस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने अपनी लॉयल्टी शो करते देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख डाला। राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह भी है कि केसी त्यागी की ओर से पीएम को भारत रत्न देने की मांग करने बांग्लादेशी खिलाड़ी के पक्ष में दिया बयान भी है।

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केसी त्यागी ने कहा कि जब बांग्लादेश की क्रिकेट टीम ने हिंदू खिलाड़ी लिटन दास को अपनी टीम का कप्तान नियुक्त किया है, तो भारत को भी मुस्तफिजुर पर विचार करना चाहिए। उसे आईपीएल में खेलने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनका यह बयान क्या आया जदयू नेताओं में नाराजगी का दौर शुरू हो गया। बात स्पष्टीकरण से ले कर कार्रवाई को ले कर होने लगी। इस बीच सुरक्षात्मक स्ट्रोक खेलते के सी त्यागी ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग कर दी। लोकसभा चुनाव 2024 के पूर्व भाजपा के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने भी नीतीश कुमार को भारत रत्न मांग देने की मांग की थी। ये वही फायर ब्रांड नेता हैं जिनका नीतीश कुमार से अच्छा रिश्ता नहीं है। इस रिश्ता बिगड़ने की शुरुआत लाल कृष्ण आडवाणी बनाम नरेंद्र मोदी की लड़ाई में नरेंद्र मोदी का पक्ष लेने के कारण हुई थी। पर राजनीतिक गलियारों में इसे गिरिराज सिंह का हृदय परिवर्तन नहीं माना जा रहा था। तब कहा गया कि तात्कालिक फायदा तो लोकसभा में हो जाएगा। नीतीश कुमार के प्रभाव वाले वोट मिल जाएगा। और दूरगामी प्रभाव यह है कि भारत रत्न के बात नीतीश कुमार की सक्रिय राजनीति का अंत हो जाएगा।

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