पटना: बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन के अंदर की कई ऐसी तस्वीरें दिखीं, जिसकी सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। सदन में पारिवारिक एकजुटता और राजनीतिक विरासत की अनूठी झलक दिखी। सदन के भीतर कई ऐसे जोड़े और परिवार दिखे जिसमें मां- बेटी और बेटा, सांसद और विधान पार्षद की बेटी और केंद्रीय मंत्री की समधन और बहू भी दिखी। सदन के अंदर रिश्तों का एक राजनीतिक गुलदस्ता दिखा। ये बिहार की सियासत और लोकतंत्र की एक नई तस्वीर है। यह जुगलबंदी दिखाती है कि कैसे बिहार की राजनीति में कई परिवार एक साथ सक्रिय होकर सत्ता और सदन की बागडोर संभाल रहे हैं। इस बार के सदन में सबसे दिलचस्प और अनूठी जुगलबंदी जीतन राम मांझी के परिवार से दिखी। पूर्व मुख्यमंत्री और अब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनकी बहू दीपा मांझी (इमामगंज से विधायक) और उनकी समधन ज्योति मांझी (बाराचट्टी से विधायक) एक साथ सदन में मौजूद थीं।
दीपा मांझी और ज्योति मांझी का एक ही विधानसभा में होना और एक ही दिन शपथ लेना, तस्वीर के एक फ्रेम में होना न केवल उनके पारिवारिक बंधन को मजबूत करता है, बल्कि बिहार की जमीनी राजनीति में महिलाओं की बढ़ती सामूहिक भागीदारी को भी उजागर करता है। इन दोनों का उत्साह सदन के अंदर चर्चा का विषय रहा। सदन के अंदर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के परिवार से भी मजबूत प्रतिनिधित्व दिखा। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने विधायक के रूप में सदन में प्रवेश किया। अब वे बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री भी हैं। अपने पिता की तरह दीपक प्रकाश भी सक्रिय राजनीति में अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार हैं। यह पिता-पुत्र की साझेदारी दिखाती है कि कैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक पूंजी नई पीढ़ी को विरासत में मिल रही है, जो बिहार की सत्ता और सामाजिक समीकरणों को प्रभावित करती है। दीपक प्रकाश आरएमएल के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं और विदेश से पढ़ाई करके लौटे हैं। चूंकि वह अभी ना ही विधायक हैं और ना ही एमएलसी हैं तो उन्हें 6 महीने के अंदर राज्य विधानमंडल के किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा। उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता भी सदन के अंदर अपने बेटे के ठीक पीछे खड़ी हुई दिखीं।
उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी सासाराम से चुनाव जीतकर विधायक बनी हैं। कुल मिलाकर उपेंद्र कुशवाहा के परिवार से उनके बेटे और पत्नी को बिहार विधानसभा में जगह मिली है। दोनों बिहार विधानसभा की शोभा बढ़ा रहे हैं। ये तस्वीर भी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय है। सदन के गलियारों में विधान पार्षद (MLC) दिनेश सिंह और उनकी एलजेपी सांसद वीणा सिंह की बेटी कोमल सिंह ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया। कोमल सिंह ने पहली बार विधायक के रूप में शपथ ली। यह दिखाता है कि कैसे माता-पिता (विधान पार्षद और सांसद) की राजनीतिक शक्ति और पहुंच उनकी अगली पीढ़ी को सदन तक ले आई है। कोमल सिंह पहली बार विधानसभा पहुंची हैं। उन्होंने हालांकि अपनी मां और पिता की विरासत को संभालते हुए पांच साल पहले सियासत में कदम रख दिया था। उन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव में एलजेपी के उम्मीदवार के तौर पर गायघाट से चुनाव लड़ा था।
वे पराजित रही थीं। उन्हें तीसरा स्थान मिला था। लेकिन इस बार उन्होंने सफलता प्राप्त की। बिहार विधानसभा के अंदर के ये दृश्य बिहार के लोकतंत्र की एक जटिल लेकिन महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करते हैं। जबकि कई बार पारिवारिक राजनीति पर भाई-भतीजावाद के आरोप लगते हैं, वहीं दूसरी ओर, ये जुगलबंदियां यह भी दिखाती हैं कि कैसे राजनीतिक परिवार न केवल अपनी विरासत को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि महिलाएँ भी इन सशक्त परिवारों के माध्यम से राजनीति में अपनी जगह सुनिश्चित कर रही हैं। सदन में मांओं, बेटों, और बहुओं का एक साथ होना यह साबित करता है कि बिहार की राजनीति की जड़ें अब सिर्फ पुरुष प्रधान नेतृत्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पारिवारिक गठजोड़ बिहार की सत्ता और समाज को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।







