पटना: बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। माना जा रहा है कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि नीतीश कुमार के बाद बिहार की कमान किसके हाथ में जाएगी।
नीतीश कुमार के इस कदम के बाद राज्य की सियासत में अटकलों का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार मुख्यमंत्री पद भाजपा के हिस्से में जा सकता है, जबकि जेडीयू को उपमुख्यमंत्री पद मिल सकता है। हालांकि अभी तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कई नेताओं को संभावित दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और विधायक संजय चौरसिया जैसे नाम चर्चा में हैं। लेकिन भाजपा का राजनीतिक इतिहास रहा है कि वह अक्सर आखिरी समय में चौंकाने वाला फैसला लेती है, इसलिए अंतिम नाम को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है।
इस बीच एक पुराना बयान भी फिर से चर्चा में आ गया है। विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चुनावी सभाओं में दो नेताओं के लिए खास बात कही थी। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा था कि अगर इन नेताओं को प्रचंड बहुमत से जिताया गया तो उन्हें “बड़ा आदमी” बनाया जाएगा। उस समय यह बयान काफी चर्चा में रहा था।
इन दो नेताओं में पहला नाम सम्राट चौधरी का बताया जाता है, जो तारापुर सीट से भारी मतों से जीते थे। वहीं दूसरा नाम सीतामढ़ी से विधायक सुनील कुमार पिंटू का है। अब जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज हो गई है, तो अमित शाह के उस पुराने वादे की याद एक बार फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है।







