कटिहार: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच सीमांचल में दो दोस्तों की पुरानी दोस्ती का नया रंग दिखाई दे रहा है। ये दोस्त हैं- आफताब आलम और कंचन दास। आफताब आलम जब नीला रंग की पोशाक पहनते हैं तो कंचन दास भी नीले रंग की ही पोशाक पहनते हैं। अगर कंचन दास गुलाबी रंग का कुर्ता पहना है तो आफताब आलम भी गुलाबी रंग के ही कुर्ते-पजामा में नजर आते हैं। यह सिलसिला दोनों के नेता बनने या टिकट मिलने के बाद से नहीं, बल्कि लगभग 35 साल से जारी है। बिहार के खासकर सीमांचल के ‘हॉट कम्युनल राजनीति’ के बीच आफताब कंचन की दोस्ती की चर्चा बेहद खास है।
दोनों लगभग 35 सालों से अपने परिवार के साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं। अब एआईएमआईएम से आफताब आलम प्राणपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार हैं। इसलिए मित्र कंचन दास एआईएमआईएम के ‘सिपाही’ बनकर मजबूती से दोस्त के लिए स्टार कैंपेनर की भूमिका निभा रहे हैं। लोग इस जोड़ी की इसलिए भी सराहना करते हैं क्योंकि यह महज चुनावी दिखावे वाले जोड़ी नहीं है, बल्कि लगभग 33 सालों से आफताब और कंचन के यह दोस्ती इसी तरह बरकरार है।
विधानसभा चुनाव के दौर के बीच दोनो दोस्तों की दोस्ती के इस अलग रंग में है। दोनों ने कहा कि अगर आफताब विधायक बनता है तो सदन के अंदर आफताब रहेगा, लेकिन सदन के बाहर कंचन ‘विधायक’ रहेगा यानी क्षेत्र को दो विधायक मिलेगा। प्राणपुर विधानसभा में मो आफताब आलम का मुकाबला एनडीए की ओर से बीजेपी प्रत्याशी निशा सिंह और महागठबंधन की ओर से राजद के प्रत्याशी इशरत परवीन से है। प्राणपुर सीट मुस्लिम बहुल सीट है। इस सीट पर करीब 47 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। यहां त्रिकोणीय मुकाबला होता दिख रहा है।







