
पटना: बिहार की नई सरकार अब यहां की जनता के सामने है। चेहरे क्लियर हैं, नाम साफ है। लेकिन कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिन्हें ये सौभाग्य नहीं मिला। सौभाग्य इसलिए कि वो पिछली सरकार में न सिर्फ मंत्री थे बल्कि महत्वपूर्ण विभाग भी संभाल रहे थे। बीजेपी और जेडीयू के कुल 19 ऐसे मंत्री हैं जो टिकट पाने में तो कामयाब रहे, लेकिन मंत्री पद से दूर ही रह गए। रेणु देवी बिहार की उपमुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। पिछली सरकार में रेणु देवी को पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग मिला था। बेतिया से उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में छठी बार जीत हासिल की। उन्हें और उनके सारे समर्थकों को उम्मीद थी कि एक बार से रेणु देवी नीतीश मंत्रिमंडल का हिस्सा बनेंगी। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। नीतीश मिश्रा भी उन चेहरों में शामिल थे, जो पिछली सरकार में मंत्री थे उन्हें उद्योग विभाग विभाग का मंत्री बनाया गया था।
उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में बिहार के उद्योग जगत में निवेश का रास्ता खोल दिया था। जाले से उनके फिर से चुनाव जीतने के बाद उनके भी मंत्री बनने की उम्मीद थी। लेकिन इस दफे उन्हें नीतीश कैबिनेट में जगह नहीं मिली। BJP के जीवेश कुमार दरभंगा के जाले से तीसरी बार विधायक बने हैं। इससे पहले 2020 में भी वो विधायक बने थे। वो पिछली नीतीश सरकार में मंत्री थे। उनके पास श्रम संसाधन और सूचना प्रावैद्यिकी विभाग था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार वो मंत्री बनेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उन्हें नीतीश सरकार के नए मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। BJP के गया शहर से 9 बार के विधायक पूर्व मंत्री प्रेम कुमार का नाम भी मंत्री पद की दौड़ में आया था। माना जा रहा था कि उन्हें भी मंत्री बनाया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, प्रेम कुमार को नीतीश कुमार की कैबिनेट में जगह नहीं मिली। लेकिन NBT संवाददाता को विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि प्रेम कुमार के लिए इससे भी बड़ी कुर्सी इंतजार कर रही है। प्रेम कुमार बिहार विधानसभा के नए स्पीकर यानी अध्यक्ष होंगे।
नीरज सिंह बब्लू ने फिर से सुपौल के छातापुर से बिहार चुनाव 2025 में जीत दर्ज की। पिछली सरकार में उनके पास PHED विभाग था। नीरज सिंह बब्लू दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई भी हैं। इस बार उन्हें भी मंत्री बनने की उम्मीद थी। लेकिन शपथ ग्रहण ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कुढ़नी से बीजेपी के विधायक चुने गए केदार प्रसाद गुप्ता को भी फिर से मंत्री बनने की उम्मीद थी। केदार प्रसाद गुप्ता पिछली नीतीश सरकार में पंचायती राज विभाग की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पूरी चर्चा थी कि फिर से मंत्री बनेंगे। लेकिन उनकी हसरत भी अधूरी रह गई। कृष्णनंदन पासवान हरसिद्धि के विधायक बने हैं। इससे पहले पिछली सरकार में वो गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री थे। माना जा रहा था कि दलित चेहरा होने के चलते उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में जगह मिल ही जाएगी। लेकिन बीजेपी ने एक और दलित चेहरे को आगे करते हुए लिस्ट से उनका नाम काट दिया। विजय कुमार मंडल ने सिकटी विधानसभा से जीत दर्ज की है। विजय इससे पहले पूर्ववर्ती नीतीश कुमार सरकार में आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री थे। उन्होंने अररिया जिले में सिकटी से तीसरी बार जीत दर्ज की थी। समर्थक जोर-शोर से उन्हें फिर से मंत्री बनाने की मांग कर रहे थे। लेकिन आखिर में विजय कुमार मंडल का नाम भी लिस्ट से कट गया।
कृष्ण कुमार मंटू एक बार फिर से सारण की अमनौर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। नीतीश की पिछली सरकार में कृष्ण कुमार मंटू सूचना एवं प्रावैद्यिकी मंत्री थे। उन्हें भी पूरी उम्मीद थी कि इस बार भी वो नीतीश कुमार की कैबिनेट का हिस्सा बनेंगे, लेकिन उन्हें भी मायूसी ही हाथ लगी। संजय सरावगी बीजेपी के सबसे चर्चित नाम हैं। संजय सरावगी ने दरभंगा शहर सीट से छठी बार जीत का परचम लहराया। बीजेपी में उनकी गिनती भी बिहार के कद्दावर नेताओं में की जाती है। वो पिछली सरकार में भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री थे। लेकिन इस बार उन्हें भी बीजेपी ने मंत्रियों की लिस्ट में जगह नहीं दी। राजू कुमार सिंह मुजफ्फरपुर के साहेबगंज से फिर से विधायक चुने गए हैं। इससे पहले पिछली सरकार में वो पर्यटन मंत्री थे। लेकिन उनके साथ एक बड़ा कांड भी जुड़ा हुआ था। 2019 में नई दिल्ली के एक फॉर्म हाउस में नए साल की पार्टी के दौरान चली गोली से एक महिला की मौत हो गई थी। इस केस में वो आरोपी बनाए गए थे। इस बार उनका टिकट भी मंत्रिमंडल में कन्फर्म नहीं हुआ। महेश्वर हजारी नीतीश कुमार के खास नेताओं में से एक माने जाते थे। वो पिछली सरकार में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री थे। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने बेटे सन्नी हजारी को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाया था।
विरोधी पार्टी से टिकट दिलवाने के बाद नीतीश कुमार समेत पूरी जदयू उनसे भीतर ही भीतर नाराज थी। माना जा रहा है कि इसी नाराजगी के चलते उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। डॉ सुनील कुमार BJP के टिकट पर फिर से बिहारशरीफ के विधायक चुने गए हैं। पुरानी सरकार में वो वन एवं पर्यावरण मंत्री थे। इस बार उन्हें भी मंत्री पद की पूरी उम्मीद थी। लेकिन उनकी हसरत भी पूरी नहीं हुई। संतोष कुमार सिंह कैमूर के मोहनिया के रहने वाले हैं। वो भारतीय जनता पार्टी के विधायक नहीं बल्कि विधानपार्षद यानी MLC हैं। पिछली सरकार में उनके पास श्रम संसाधन मंत्री बनाया गया था। लेकिन इस दफे उन्हें रिपीट नहीं किया गया। जनक राम बिहार विधानपरिषद से बीजेपी के सदस्य हैं। MLC जनक राम पिछली सरकार में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री थे। जनक राम गोपालगंज से बीजेपी के सांसद भी रह चुके हैं। इनकी प्रोफाइल से लग रहा था कि ये फिर से मंत्री बनेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हरि सहनी बिहार में बीजेपी के MLC हैं। पिछली सरकार में हरि सहनी पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा कल्याण विभाग के मंत्री थे।
माना जा रहा था कि इस बार भी हरि सहनी को नीतीश कैबिनेट में जगह मिलेगी। लेकिन उनकी उम्मीद भी फिलहाल टूट गई है। शीला कुमारी ने फिर से फुलपरास विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की। पिछली नीतीश सरकार में वो परिवहन मंत्री थीं। जीत के बाद उनके समर्थकों को भी फिर से शीला कुमारी के मंत्री बनने की उम्मीद थी। लेकिन मंत्रिमंडल की पूरी तस्वीर सामने आते ही उनकी उम्मीद भी टूट गई। रत्नेश सदा सहरसा की सोनबरसा विधानसभा सीट से फिर से जीते हैं। पिछली सरकार में रत्नेश सदा को मद्य निषेध उत्पाद और निबंधन मंत्री थे। लेकिन सहरसा में घटी सीट के चलते पहले ही ऐसा लगने लगा था कि इस बार वो मंत्री पद से दूर रखे जाएंगे। आखिर में वही हुआ जिसकी शंका थी। जयंत राज बांका के अमरपुर से विधायक चुने गए हैं। पिछली वाली नीतीश कुमार सरकार में जयंत राज ग्रामीण कार्य मंत्री थे। उनके बारे में भी चर्चा चल रही थी कि वो इस बार भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। लेकिन लिस्ट से उनका नाम भी कट गया।






