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सुशासन की 17वीं यात्रा, 20 साल का सफर; नीतीश के लिए क्यों खास है चंपारण की धरती

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17th iteration of good governance, a 20-year journey; why Champaran is so special to Nitish

पटना: बिहार की राजनीति में ‘यात्राओं के नायक’ माने जाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता के द्वार पर होंगे। 12 जुलाई 2005 को तत्कालीन राबड़ी सरकार के खिलाफ ‘न्याय यात्रा’ के जरिए सत्ता परिवर्तन की नींव रखने वाले नीतीश अब 2025 के चुनाव में प्रचंड जीत के बाद अपनी 17वीं यात्रा पर निकल रहे हैं। 16 जनवरी से शुरू हो रही ‘ समृद्धि यात्रा ‘ उनके दो दशक के सुशासन के सफर को समृद्धि की मंजिल तक ले जाने का एक बड़ा माध्यम है।

ये यात्रा न केवल विकास कार्यों का लेखा-जोखा है, बल्कि जनता के भरोसे को और मजबूत करने की कवायद भी है। नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा 2005 में न्याय की मांग के साथ शुरू हुई थी। पिछले 20 वर्षों में उन्होंने 16 अलग-अलग यात्राओं के माध्यम से बिहार की नब्ज टटोली है। अब 2025 में मिले भारी बहुमत के बाद, उनकी ये 17वीं यात्रा राज्य को आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध बनाने के संकल्प पर आधारित है। नीतीश कुमार के लिए पश्चिम चंपारण की धरती हमेशा से भाग्यशाली रही है।

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उनकी अधिकांश ऐतिहासिक यात्राओं का शुभारंभ यहीं से हुआ है। माना जा रहा है कि इस बार भी ‘समृद्धि यात्रा’ भितिहरवा या वाल्मीकिनगर जैसे प्रतीकात्मक स्थानों से शुरू होगी। गांधी की इस कर्मभूमि से यात्रा शुरू करना नीतीश के लिए शुभ संकेत और राजनीतिक मजबूती का प्रतीक रहा है। समृद्धि यात्रा का मुख्य उद्देश्य सात निश्चय और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानना है। मुख्यमंत्री खुद जिलों में जाकर ये सुनिश्चित करेंगे कि विकास का लाभ हर गांव तक पहुंच रहा है या नहीं। ये यात्रा अगले पांच वर्षों के रोडमैप और जन-आकांक्षाओं को समझने का सबसे बड़ा मंच साबित होगी।

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