Home खेल एशियाई हॉकी की बादशाहत दांव पर, राजगीर में भारत और कोरिया आमने-सामने

एशियाई हॉकी की बादशाहत दांव पर, राजगीर में भारत और कोरिया आमने-सामने

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Asian hockey's supremacy at stake, India and Korea face to face in Rajgir

 राजगीर: एशिया कप हॉकी 2025 का सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबला आज राजगीर के मैदान में खेला जाएगा। फाइनल में भारत (FIH रैंक-07) और दक्षिण कोरिया (FIH रैंक-15) आमने-सामने होंगे। यह मुकाबला दोनों टीमों की रणनीति, ताकत और अनुभव की असली परीक्षा साबित होगा। सुपर-4 चरण में दोनों टीमों का पिछला मुकाबला 2–2 से बराबरी पर समाप्त हुआ था। पांच बार की विजेता कोरिया खिताब बचाने उतरेगी, जबकि तीन बार की चैंपियन भारत एशियाई हॉकी की बादशाहत छीनने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

भारत की तैयारी को लेकर कोच क्रेग फुल्टन ने कही ये बात

भारत के कोच क्रेग फुल्टन की रणनीति हाई प्रेसिंग और आक्रामक खेल पर केंद्रित है। पेनल्टी कॉर्नर में हरमनप्रीत और युवा जुगराज सिंह निर्णायक साबित हो सकते हैं। मिडफील्ड में हार्दिक, मनप्रीत और विवेक सागर की भूमिका अहम है। फॉरवर्ड लाइन में अभिषेक, मंदीप सिंह, शिलानंद और सुखजीत की मौजूदगी भारत को गोल करने में सक्षम बनाती है। गोलकीपर कृष्ण पाठक और सुरज करकरे की रोटेशन पॉलिसी टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाती है। घरेलू दर्शकों का समर्थन भारत के लिए अतिरिक्त ऊर्जा का स्रोत होगा। हालांकि, भारत की कमजोरियों में कभी-कभी फिनिशिंग चूक और रिवर्स टॉमहॉक व सर्कल शॉट्स में सटीकता की कमी शामिल है। तेज़ काउंटर अटैक झेलते समय दबाव में आने की प्रवृत्ति में सुधार की आवश्यकता है।

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कोरिया की ताकत

कोरिया की टीम अनुशासित डिफेंस, तेज़ काउंटर अटैक और पेनल्टी कॉर्नर में माहिर है। अनुभवी खिलाड़ियों की वजह से टीम दबाव में भी संतुलित रहती है। जांग जोंगह्यून, किम जुंगहून और ली नामयोंग को भारत के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। आक्रामक खेल में कमी और लगातार गोल करने में दिक्कत कोरिया की चुनौतियां हो सकती हैं।

जानें क्या कहते हैं आंकड़े

भारत और कोरिया के बीच अब तक एशिया कप में 21 मुकाबले खेले गए हैं। भारत ने 10 मैच जीते, कोरिया ने 2 और 9 मैच बराबरी पर समाप्त हुए। आँकड़े भारत के पक्ष में हैं, लेकिन कोरिया की अनुशासित हॉकी और अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राजगीर में दर्शकों का उत्साह इस टूर्नामेंट की सफलता का प्रतीक है। राज्य सरकार, खेल विभाग और हॉकी इंडिया के सहयोग से यह आयोजन बिहार में हॉकी का उत्सव बन गया है। हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह और आयोजन सचिव रवींद्रन शंकरण की मेहनत विशेष रूप से सराहनीय है।

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