Ranjan Pathak built his underworld empire with the help of AK-47 and the Sigma Gang.

सीतामढ़ीदिल्ली के रोहिणी में बिहार एसटीएफ और दिल्ली पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन में बिहार के सीतामढ़ी में सक्रिय सिग्मा गैंग के चार गैंगस्टर मारे गए। पुलिस की गोली का शिकार बने गैंगस्टर में 25 साल का रंजन पाठक भी शामिल है। सीतामढ़ी जिले में ताबड़तोड़ हत्याकांड के बाद रंजन पाठक को बिहार पुलिस पिछले एक महीने से ढूंढ रही थी। उसने पुलिस की नींद इस कदर उड़ाई थी कि एसटीएफ ने उससे संपर्क में आने वाले संदिग्धों को हिरासत में रखा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सीतामढ़ी के गांव मलाही के रहने वाले रंजन ने पिछले 7-8 साल में बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया था। उसके हौसले इतने बुलंद थे कि हत्या के बाद उसने खुले तौर पर हत्या की जिम्मेदारी ली थी।

रंजन पाठक के साथ एनकाउंटर में तीन और मोस्ट वॉटेंड मनीष पाठक, अमन ठाकुर और बिमलेश महतो मारे गए। ये सभी पाठक के गैंग सिग्मा एंड कंपनी के शूटर थे। इस गैंग ने सीतामढ़ी के अलावा पड़ोसी जिले शिवहर और मधुबनी में आतंक का साम्राज्य फैला रखा था। सीतामढ़ी के सुरसंड थाना क्षेत्र का गांव मलाही की सीमा नेपाल से लगती है। यह भौगोलिक स्थिति रंजन पाठक और उसके गुर्गों के लिए वरदान की तरह था। बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क बिहार से नेपाल तक फैला था। वारदात के बाद ये सभी नेपाल में छिप जाते थे।

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डीजीपी ने बताया कि एनकाउंटर के बाद इन अपराधियों के पास से AK-47 समेत कई अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए हैं। अभी हाल में भी सीतामढ़ी जिले में की हत्याएं हुईं, जिसमें रंजन पाठक के सिग्मा गिरोह का नाम सामने आया। बाजपट्टी में आदित्य सिंह की हत्या के बाद गैंग ने परोहा के मदन कुशवाहा को निशाना बनाया। ब्रह्मर्षि सेना के जिला अध्यक्ष राम मनोहर शर्मा की हत्या के बाद रंजन पाठक ने खुलेआम पर्चा जारी कर हत्या की जिम्मेदारी ली थी। रंजन पाठक ने कम उम्र में ही जुर्म की दुनिया में कदम रख दिया था। खुद को वो पुलिसिया अत्याचार का एक शिकार बताकर सहानुभूति भी बटोर लेता था।