यूपी विधान परिषद की 11 सीटों पर मतदान शुरू, 152 प्रत्याशी मैदान में
Voting begins for 11 seats in the UP Legislative Council; 152 candidates are in the fray.

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए शुक्रवार सुबह आठ बजे से मतदान शुरू हो गया। मतदान शाम चार बजे तक चलेगा। इन चुनावों में छह शिक्षक और पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

प्रदेश के 72 जिलों में मतदान के लिए 2,697 मतदेय स्थल बनाए गए हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में 14.81 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं, जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

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निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदान समाप्त होने तक संबंधित क्षेत्रों में शराब की दुकानें बंद रखने के निर्देश हैं। वहीं, मतदान में भाग लेने वाले पात्र कर्मचारियों और शिक्षकों को शुक्रवार को विशेष आकस्मिक अवकाश देने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

भाजपा और सपा के बीच मुकाबले पर नजर

इन चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी। दोनों दलों के लिए विधान परिषद की ये सीटें राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। सपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशियों की जीत का दावा किया है।

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के ये चुनाव वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे हैं। ऐसे में इनके नतीजों को दोनों प्रमुख दलों के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। चुनाव परिणामों से शिक्षक और स्नातक मतदाता वर्ग के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रभाव का भी संकेत मिल सकता है।

27 अक्टूबर को होगी मतगणना

मतदान समाप्त होने के बाद सभी प्रत्याशियों का चुनावी भविष्य मतपेटियों में बंद हो जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। इसी दिन सभी 11 सीटों के परिणाम घोषित किए जाने की संभावना है।

अब राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की नजर मतदान के रुझान तथा मतगणना पर टिकी है। इन परिणामों से विधान परिषद में दलों की स्थिति पर असर पड़ने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों को भी दिशा मिलने की उम्मीद है।